अमांडा फ़िगेरास: जब पत्रकारिता की पड़ताल ने सवाल उनसे ही पूछे

अमांडा फ़िगेरास ने यह तलाश किसी नए धर्म की खोज में शुरू नहीं की थी। वे स्पेनिश पत्रकार थीं और इस्लाम से उनका पहला लगातार संपर्क 11 मार्च 2004 के मैड्रिड बम धमाकों के बाद हुआ। काम के सिलसिले में उन्होंने मुस्लिम समुदायों और बदले की कार्रवाई को लेकर उनकी आशंकाओं पर रिपोर्टिंग की। तब तक इस्लाम के बारे में उनकी जानकारी मुसलमानों से कम और प्रचलित सार्वजनिक छवियों से अधिक बनी थी: आतंकवाद, विदेशी पहचान और यह धारणा कि मुस्लिम महिला अपनी स्वतंत्रता खो देती है।
दूसरों के बारे में शुरू हुई पड़ताल धीरे-धीरे सवालों को उनकी ओर लौटा लाई। रिपोर्टिंग ने उन्हें पढ़ने और मुस्लिम स्त्री-पुरुषों से मिलने तक पहुँचाया। बाद में उन्होंने कहा कि तभी जाना कि वास्तव में उनकी जानकारी कितनी कम थी। निर्णय तत्काल नहीं था। उन्होंने इसे लंबी प्रक्रिया बताया, जिसमें आगे बढ़ना और पीछे हटना दोनों थे, और इस विचार का प्रतिरोध भी कि वे स्वयं मुस्लिम हो सकती हैं। क्या कोई स्पेनिश और यूरोपीय स्त्री मुस्लिम भी हो सकती है? क्या आस्था उनसे अपने व्यक्तित्व के कुछ हिस्से छोड़ने को कहेगी?
समय के साथ विरासत में मिली छवियों और किताबों तथा लोगों में मिली वास्तविकता के बीच दूरी बढ़ती गई। उन्हें याद है कि वे बिस्तर पर क़ुरआन पढ़ती थीं और पढ़ते-पढ़ते उन्हें लगता था—जैसा उन्होंने स्वयं बताया—कि उसके अर्थ उनसे जुड़ रहे हैं और बातें एक-दूसरे से मेल खाने लगी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बाहरी चिह्नों से परे अच्छाई, क्षमा, शांति, सहिष्णुता, सामाजिक न्याय और वस्तुओं से कम बँधी अधिक आध्यात्मिक ज़िंदगी ने आकर्षित किया। प्रक्रिया के अंत में उन्होंने स्वयं को मुस्लिम के रूप में पहचाना।
परिवार को बताना कोई औपचारिक घोषणा नहीं थी। उनके अनुसार उन्होंने माता-पिता को बैठाकर कोई खास बातचीत नहीं की; समय बीता और फिर स्वाभाविक ढंग से बताया कि वे कुछ समय से मुस्लिम हैं। पहली प्रतिक्रिया अपरिचय से उपजा डर था। बाद में भाई-बहनों से अधिक गहरी बातचीत हुई।
उन्होंने बाद में हिजाब अपनाया और उनकी दृष्टि में इस निर्णय की संभावित पेशेवर क़ीमत थी। उन्होंने कहा कि अख़बार एल मुंडो की नौकरी छोड़ने के बाद ही हिजाब पहना, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे मिलने वाले काम सीमित हो सकते हैं। उन्होंने इसे एक आशंका के रूप में रखा, अपने साथ घट चुकी सिद्ध घटना के रूप में नहीं।
‘मैं मुस्लिम हूँ’ कहने की कठिनाई उनके सार्वजनिक काम का हिस्सा बन गई। उन्होंने अपने अनुभव पर लिखा, धर्म को जातीय मूल के साथ मिला देने पर प्रश्न उठाया और इस माँग को अस्वीकार किया कि मुसलमान लगातार अपनी निष्ठा सिद्ध करें या निजी फ़ैसलों का स्पष्टीकरण दें। उन्होंने सीखने के लिए पूछे गए सवाल और हमले का बहाना बने सवाल के बीच भी अंतर किया।
उनका निर्णय किसी एक घटना का परिणाम नहीं था; समझ धीरे-धीरे बढ़ी और पुराने पूर्वाग्रह ढीले पड़े। उन्होंने दूसरों के जीवन की पड़ताल शुरू की थी और अपने ही जीवन के प्रश्नों तक पहुँच गईं। अनुभव लिखते समय भी निजता महत्वपूर्ण रही: वे समझने के लिए पूछे गए सवाल और किसी को कटघरे में खड़ा करने वाले सवाल में अंतर करती थीं।
स्रोत
- RTVE / RNE — प्रत्यक्ष ऑडियो गवाही, 2 मार्च 2018
- El Salto — प्रत्यक्ष साक्षात्कार, 6 जून 2018; 18 फ़रवरी 2025 को अद्यतन
- El País — प्रत्यक्ष साक्षात्कार, 21 मार्च 2018
- El Español — प्रत्यक्ष साक्षात्कार, 6 मार्च 2018
- RTVE / Medina en TVE — इस्लाम क्यों, 2018
फ़ोटोग्राफ़: Daniel Cañibano / Unsplash.
