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मंडला मंडेला: चुना हुआ विश्वास और विरासत में मिली ज़िम्मेदारी

दिन की अंतिम रोशनी में केप टाउन का टेबल माउंटेन
चित्र: Thomas Bennie · Unsplash लाइसेंस

फ़रवरी 2016 में Sunday Times में प्रकाशित शेख रियाद वॉल्स के बयान के अनुसार, नवंबर 2015 में न्कोसी ज़्वेलिवेलिले ‘मंडला’ मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका के लेनासिया में इस्लाम स्वीकार किया। वे नेल्सन मंडेला के पोते और अमाख़ोसा समुदाय के पारंपरिक मुखिया थे, इसलिए उनका व्यक्तिगत निर्णय शीघ्र ही सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया। [MM-S1]

6 फ़रवरी 2016 को उन्होंने केप टाउन की केंसिंग्टन मस्जिद में राबिया क्लार्क से इस्लामी निकाह किया। विवाह के बाद जारी बयान में उन्होंने राबिया के परिवार और मुस्लिम समुदाय को उनका स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि दोनों अलग सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में पले, फिर भी उनका मिलन दक्षिण अफ्रीकी होने की साझा पहचान को भी प्रकट करता है। [MM-S2, MM-S3]

उनके इस्लाम स्वीकार करने से कुछ पारंपरिक नेताओं के सामने प्रश्न उठा: क्या विरासत में मिला मुखिया अपनी पसंद का धर्म अपना सकता है और साथ ही समुदाय के प्रति अपना दायित्व निभा सकता है? पारंपरिक नेताओं की एक परिषद के अध्यक्ष ने मंडेला की बात बताई कि इस्लाम वह धर्म है जिसे उन्होंने अनुसरण के लिए चुना, जबकि जन्म से मिली परंपरा की ज़िम्मेदारी को वे निभाते रहेंगे। [MM-S1]

इस्लाम उनका निजी धार्मिक चुनाव था; नेतृत्व एक विरासत में मिला सामाजिक दायित्व। उन्होंने इस विचार को स्वीकार नहीं किया कि इस्लाम चुनते ही उनका सार्वजनिक दायित्व समाप्त हो जाता है। दूसरे पारंपरिक नेताओं ने भी प्रत्येक मुखिया के धार्मिक चुनाव के अधिकार का समर्थन किया। [MM-S1]

निकाह कराने वाले इमाम ने मुस्लिम नेताओं से मंडेला का मार्गदर्शन करने को कहा। उन्होंने समुदाय से उनकी धार्मिक समझ के लिए दुआ की अपील की। [MM-S3]

उनकी कहानी विश्वास और विरासत में मिली जिम्मेदारी का प्रश्न सामने रखती है: कोई व्यक्ति अपना विश्वास चुनते हुए अपने समुदाय और संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी कैसे निभाए? [MM-S1]

स्रोत

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