एंथनी मुंडीन: एक किताब जिसने सवालों का दरवाज़ा खोला

एंथनी मुंडीन ऑस्ट्रेलिया के एक खेल-परिवार में बड़े हुए। अपनी आत्मकथात्मक बात में उन्होंने कहा कि चर्च ऑफ़ इंग्लैंड में उनका बपतिस्मा हुआ था, पर बचपन में धर्म जीवन का प्रमुख हिस्सा नहीं था। युवावस्था में वे एक सृष्टिकर्ता के अस्तित्व पर विश्वास करते रहे, लेकिन जिस रूप में ईसाई त्रित्व उन्हें समझाया गया, उसे समझने में कठिनाई हुई।
उनकी घोषित खोज की शुरुआत एक किताब से हुई। रग्बी लीग में आगे बढ़ते समय ख़ोदर नासर ने उन्हें द ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ मैल्कम एक्स दी। मुंडीन ने बाद में लिखा कि वे कभी धैर्यवान पाठक नहीं थे, फिर भी किताब छोड़ नहीं पाए; उसके बाद उन्होंने मुस्लिम मित्रों से दुनिया, जीवन और धर्म के बारे में अनेक प्रश्न पूछे।
यात्रा किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की प्रशंसा पर नहीं रुकी। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा उनकी आत्मकथा के आधार पर तैयार सार में लंबे समय तक क़ुरआन पढ़ने और मित्र सोलोमन हाउमोनो की भूमिका का उल्लेख है। साथ ही मुंडीन ने इस्लाम अपनाने को मुहम्मद अली या मैल्कम एक्स की नकल मानने से इनकार किया और निजी अध्ययन को अधिक महत्व दिया।
अपने व्यक्तिगत विवरण में मंडीन ने कहा कि उन्होंने इक्कीस वर्ष की उम्र में शहादा पढ़ा। ABC की 2014 में प्रकाशित रिपोर्ट ने उनके इस्लाम स्वीकार करने का वर्ष 1999 बताया। [M1, M2]
आत्मकथा के संदर्भ-सार में निर्णय के बाद की दिनचर्या भी आती है: पाँच वक्त की नमाज़, हलाल भोजन, शराब और सूअर के मांस से परहेज़, तथा रमज़ान के रोज़े। एक मूलनिवासी ऑस्ट्रेलियाई और मुसलमान के रूप में उनकी पहचान भी सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बनी। औपनिवेशिक इतिहास और पूर्व धर्म पर उनके विचार, हालांकि, उन्हीं की दृष्टि हैं, सर्वसम्मत फैसला नहीं।
इस वृत्तांत की सबसे स्पष्ट बात यह है कि उदाहरण सवाल खोल सकता है, खोज को समाप्त नहीं करता। किताब ने जिज्ञासा जगाई, मित्रों ने उत्तर दिए, निजी पढ़ाई चलती रही और फैसला उन्होंने स्वयं किया। विश्वविद्यालय का सार बताता है कि वे दूसरों को क़ुरआन पढ़कर अपना निर्णय करने के लिए कहते थे; यह उनकी सलाह है, जबकि परियोजना के प्रश्न-बैंक के सामान्य उत्तरों को अभी विशेषज्ञ समीक्षा चाहिए।
