सभी कहानियों पर वापस जाएँ

ब्रदर अली: जब हिप-हॉप ने ईमान का सवाल खोला

गर्म रोशनी में पुराना माइक्रोफ़ोन
चित्र: Bobby Balle · Unsplash लाइसेंस

ब्रदर अली के नाम से जाने जाने वाले अमेरिकी हिप-हॉप कलाकार ने बाद में बताया कि उन्होंने पंद्रह वर्ष की उम्र में इस्लाम स्वीकार किया। उनके जीवन के पड़ावों पर आधारित एक साक्षात्कार इस बदलाव को 1992 में रखता है। उनका रास्ता हिप-हॉप संस्कृति और माल्कम एक्स की आत्मकथा से होकर गुज़रा; किशोरावस्था में जो वे पढ़ और सुन रहे थे, उसी के साथ धर्म में उनकी रुचि बढ़ी। [1.1] [1.2]

30 जुलाई 1977 को जेसन डगलस न्यूमन के रूप में जन्मे अली अल्बिनिज़्म और कम दृष्टि के कारण हर जगह अलग दिखाई देते थे। उन्होंने बच्चों की क्रूरता, बार-बार स्कूल बदलने और अश्वेत परिवारों तथा हिप-हॉप संस्कृति में मिले अपनापन का वर्णन किया। बचपन में वे चर्च जाते थे, लेकिन बाद में कहा कि परिचित ईसाई शिक्षा से उनका जुड़ाव नहीं बन पाया। यह उनका निजी अनुभव है, किसी धर्म या समुदाय पर सामान्य निर्णय नहीं।

KRS-One उन रैप कलाकारों में थे जिन्हें वे सुनते थे। उनके एक व्याख्यान में अली को माल्कम एक्स की आत्मकथा पढ़ने की सलाह मिली। उन्होंने पुस्तक पढ़ी और बाद के साक्षात्कार में कहा कि उसी ने उनके भीतर मुसलमान बनने की इच्छा जगाई। माल्कम का प्रभाव गीतों में सुनाई देने वाले नाम तक सीमित नहीं रहा; वह उनके पढ़ने की पुस्तक और इस्लाम से परिचय का एक रास्ता बना। [3.1] [3.2]

2014 के साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उन्हें सिखाए गए कुछ ईसाई सिद्धांतों से वे सहमत नहीं हो सके, जबकि इस्लाम ने उनकी धार्मिक समझ को संबोधित किया और माल्कम एक्स की शिक्षाओं ने उसे मज़बूत किया। वर्षों बाद, 2025 में प्रकाशित बातचीत में उन्होंने इस्लाम की सार्वभौमिकता और अलग-अलग संस्कृतियों में उसकी अभिव्यक्ति को आकर्षण के कारणों में गिना। ये उनके चुनाव के वर्णन में बताए गए कारकों में शामिल थे। [4.1] [4.2]

मित्रों के बीच इस प्रतिबद्धता का व्यावहारिक असर भी था। उन्होंने ऐसा परिवेश बताया जिसमें नशा, हथियार और हिंसा मौजूद थे, और कहा कि वे नहीं जानते कि इस्लाम के बिना साथियों का दबाव सह पाते या नहीं। उनके अनुसार कुछ मित्र उनके आने पर धूम्रपान या पासे खेलना छोड़ देते थे, उनके चुनाव के सम्मान में। मित्रों का यही संबोधन ब्रदर अली नाम बना, जिसे उन्होंने साथियों के बीच सम्मान का नाम बताया। [5]

आगे यह निर्णय उनके संगीत, न्याय की भाषा और सामुदायिक काम में दिखाई दिया। उन्होंने 2010 में मक्का की हज यात्रा की और बाद के साक्षात्कारों में कला को दिल तक पहुँचने का माध्यम तथा सत्य को आत्मालोचना के साथ कहने की बात कही। 2025 तक वे परिवार सहित इस्तांबुल में रह रहे थे, इसे आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बताते हुए नमाज़ और अध्ययन जारी रखे हुए थे। तारीख़ वाले ये बयान निरंतरता दिखाते हैं, उससे आगे अनुमान नहीं।

इस्तांबुल से जुलाई 2025 की रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि वे रोज़ मस्जिद में नमाज़ के लिए आते हैं; रिपोर्ट में तुर्की सीखने और कला का काम जारी रखने का भी उल्लेख था। यह माल्कम को पढ़ने के बहुत वर्षों बाद, उस रिपोर्ट के समय का जीवन था। 2014 में युवाओं को उनकी सलाह थी कि ऐसी परिस्थितियों में जाएँ जो अपनी जानकारी को परखने के लिए मजबूर करें। उनकी अपनी कहानी में पढ़ना निर्णय से पहले आया, और बाद के पड़ावों पर भी वे उसका असर बताते रहे। [7.1] [7.2]

स्रोत

क़बस कथा-सूची पर लौटें