यूसुफ़ एस्टेस: जब समझाने की कोशिश सत्य की खोज बन गई

यूसुफ़ एस्टेस ने इस्लाम की तलाश से शुरुआत नहीं की थी। तब उनका नाम जोसेफ़ “स्किप” एस्टेस था। वे एक गहरे प्रोटेस्टेंट परिवार में पले, बारह वर्ष की आयु में बपतिस्मा लिया, कई ईसाई संप्रदायों को जाना और अनेक धर्मों के बारे में पढ़ा। वे संगीत पढ़ाते थे, चर्च में संगीत-सेवा संभालते थे और अनौपचारिक सभाओं में ईसाई धर्म का प्रचार करते थे; उनके अपने बयान के अनुसार उनका कोई निजी चर्च नहीं था।
मुसलमानों के बारे में उनकी धारणा विरोधी थी और उन्होंने इस्लाम को गंभीरता से नहीं पढ़ा था। 1991 की शुरुआत में उनके पिता ने मिस्र के एक मुसलमान, मुहम्मद अब्देल रहमान, के साथ काम शुरू किया। जोसेफ़ पहले मिलने से बचे, फिर इस इरादे से तैयार हुए कि वे उसे ईसाई बना देंगे। पर उन्हें पता चला कि मुहम्मद ईश्वर में और आदम, इब्राहीम तथा मूसा जैसे उसके नबियों में विश्वास रखते हैं। वे ईसा को भी नबी और मसीह मानते हैं। गहरे प्रश्नों से पहले ही पहला पूर्वाग्रह टूट गया।
परिचय बढ़ने और काम की यात्राओं के दौरान ईश्वर, जीवन का उद्देश्य, सृष्टि और वह्य पर बातचीत हुई। बाद में मुहम्मद परिवार के घर रहने लगे। रात के भोजन के बाद अलग-अलग बाइबिल संस्करणों की तुलना और कुरआन के संरक्षण पर चर्चा होती। मुहम्मद न दबाव डालते थे, न बीच में रोकते थे। एस्टेस की स्मृति में यह शांत सुनना प्रश्नों को बदलने की जगह देता गया।
मूल उलझन पुरानी थी: ईश्वर एक और तीन कैसे हो सकता है, एक व्यक्ति दूसरे का पाप क्यों उठाए, और बिना मध्यस्थ के ईश्वर की उपासना का क्या अर्थ है? तौहीद और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व में एस्टेस को अधिक संगत उत्तर मिला। फिर भी परिवार ने एक साथ सामूहिक निर्णय नहीं लिया; वे स्पष्ट करते हैं कि हर व्यक्ति अलग-अलग निष्कर्ष पर पहुँचा।
घर में रह रहे एक कैथोलिक पादरी ने इस्लाम स्वीकार किया, फिर एस्टेस की पत्नी ने भी ऐसा करने की इच्छा जताई। एस्टेस ने मुहम्मद से पूरी रात बात की। जब मुहम्मद फ़ज्र की नमाज़ की तैयारी कर रहे थे, एस्टेस बाहर गए और ईश्वर से मार्गदर्शन माँगा। वे बताते हैं कि उन्हें अधिक सच्चा और सीधा जीवन शुरू करने की आवश्यकता महसूस हुई। 1991 की उसी सुबह उन्होंने दो गवाहों के सामने शहादा पढ़ा। उनकी पत्नी ने थोड़ी देर बाद और पिता ने कई महीने बाद अपना निर्णय घोषित किया। [5.1] [5.2]
उन्होंने बताया कि उनकी माँ और कुछ अन्य रिश्तेदारों ने शुरू में उनके इस्लाम स्वीकार करने पर विरोध जताया। बाद में संबंध सामान्य हुए और संपर्क बना रहा।
इस्लाम स्वीकार करने के बाद एस्टेस धार्मिक परिचय के काम में लगे और उन्होंने मुस्लिम चैपलिन के रूप में जेलों में सेवा देने का वर्णन किया। मई 2011 में The National ने दुबई के एक स्कूल में छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों से उनकी बातचीत दर्ज की। जिस संवाद में वे दूसरे व्यक्ति को बदलने के इरादे से गए थे, वही अब नए लोगों तक पहुँचने का काम बन गया था। अपनी कहानी में वे इस्लाम की विरोधी छवि से तौहीद के अर्थ के सामने अपने विश्वास की दोबारा जाँच तक का सफ़र बताते थे। [7.1] [7.2]
स्रोत
- Priests and Preachers Enter Islam — IslamTomorrow — Yusuf Estes — updated 2006-01-23
- Letter to a Nikkei staff writer — IslamTomorrow — Yusuf Estes — 2000
- يوسف إستس.. داعية مسلم من رحم أميركا — الجزيرة نت — 2015-10-05
- The National — Bana Al Qabbani, Former Christian minister who converted to Islam delivers speech, 2011-05-25
