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कीस्या ऐंग: अज़ान सुनने से इस्लाम चुनने तक तेरह वर्ष

गर्म रोशनी में कालीन पर रखा बंद कुरआन
चित्र: Qur’an still life — Malik Shibly / Unsplash (Unsplash लाइसेंस).

कीस्या ऐंग, जिनका जन्मनाम ऐंग वान की है, पंद्रह वर्ष की थीं जब उन्होंने पहली बार अज़ान स्पष्ट रूप से सुनी। रमज़ान में मित्रों के साथ एक भोजनालय के पास स्केटिंग करते हुए वह ध्वनि उन्हें आकर्षित कर गई। पूछने पर पता चला कि यह नमाज़ का बुलावा है। जिज्ञासा तुरंत निर्णय नहीं बनी, पर लंबी यात्रा शुरू हुई।

उन्होंने पुराने दृष्टिकोण को किसी निश्चित धार्मिक मार्गदर्शन से रहित स्वतंत्र सोच बताया। रोज़मर्रा के जीवन और मित्रों से धीरे-धीरे इस्लाम जाना, फिर 2018 में सिंगापुर की मुस्लिम कन्वर्ट्स एसोसिएशन, दारुल अरक़म में शुरुआती आधिकारिक पाठ्यक्रम लिया।

इस्लाम चुनने का विश्वास बढ़ता गया, पर कम आयु में परिवार को चिंता थी कि वे दूसरों के प्रभाव या अस्थायी दौर में हैं। माता-पिता की सहमति उनके लिए महत्त्वपूर्ण थी, इसलिए वर्षों प्रतीक्षा की। महामारी के लॉकडाउन में माँ से बात की, पर परिवार ने विलंब चाहा; उन्होंने मतभेद को अंतिम टूटन बनाने के बजाय सीखना जारी रखा।

2022 में उन्होंने औपचारिक रूप से इस्लाम स्वीकार किया। साक्षात्कार शहादा का दिन या सभा का विवरण प्रकाशित नहीं करता, इसलिए उस स्थान को कल्पना से नहीं भरा जा सकता। इतना निश्चित है कि निर्णय किसी एक घटना से नहीं, बल्कि वर्षों की जिज्ञासा, शिक्षा और प्रतीक्षा से आया।

उन्होंने कीस्या नाम चुना, जो आयशा का एक रूप है, और चीनी नाम का ‘की’ स्वर बनाए रखा। उनके अनुसार इससे वे अपने वास्तविक व्यक्तित्व के प्रति सच्ची रह सकीं। इस्लाम स्वीकार करने का अर्थ चीनी मूल या परिवार से संबंध मिटाना नहीं था।

निर्णय के बाद वे स्वयं से पूर्णता की माँग करने लगीं। पहले सोचा था कि तुरंत हिजाब पहनेंगी, फिर समझा कि बाहरी आचरण को शिक्षा और चरित्र के साथ बढ़ने में समय चाहिए। साक्षात्कार में उन्होंने इस्लाम को जीवन, कठिनाई और अपनी प्रतिक्रिया समझने की शिक्षा बताया, केवल रूप बदलना नहीं।

यह यात्रा दिखाती है कि लंबा रास्ता ईमानदार प्रश्न को कमजोर नहीं करता। ज्ञान किशोरावस्था में सुनी ध्वनि से शुरू होकर वर्षों की शिक्षा और पारिवारिक संवाद के बाद विश्वास बन सकता है। नए मुसलमान को जानना चाहिए कि क्रमिक विकास का अर्थ पूर्ण होने तक रुके रहना नहीं, और उचित सांस्कृतिक पहचान व परिवार की सेवा विश्वास के साथ रह सकती हैं।

स्रोत

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