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अमांडा मागल्याइस: दुबई की नई ज़िंदगी से आस्था के चुनाव तक

गर्म रोशनी में कालीन पर रखी बंद क़ुरआन
Malik Shibly / Unsplash — स्रोत · लाइसेंस.

अमांडा मागल्याइस 2005 में अपनी बहन से मिलने दुबई पहुँची थीं। ब्राज़ील से आई अमांडा को शहर पसंद आया और उन्होंने वहीं रहने का निर्णय लिया। नए परिवेश की रोज़मर्रा की ज़िंदगी उन्हें इस्लाम के निकट लाई। यह अनुभव उन्होंने ANBA की 3 मार्च 2014 को प्रकाशित बातचीत में बताया। [1]

उन्होंने अपनी पहले की आस्था को ऐसा कैथोलिक विश्वास बताया जिसका वे नियमित पालन नहीं करती थीं। दुबई में जिज्ञासा ने उन्हें इस्लाम की किताबें ख़रीदने की ओर बढ़ाया और कपड़ों की पसंद भी धीरे-धीरे बदली। धर्म के बारे में सीखना नए परिवेश में उनके जीवन का हिस्सा बनने लगा। [1]

इस्लाम में उन्हें क्या अच्छा लगा, यह बताते हुए उन्होंने उसकी सरलता और ईश्वर से सीधे संबंध पर ज़ोर दिया। ईश्वर से निकटता उनका बताया हुआ आकर्षण था, जो शहर और स्थानीय संस्कृति की प्रशंसा से आगे जाता था। [1]

इस बातचीत की रिपोर्ट उनके इस्लाम अपनाने के निर्णय को 2007 में रखती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने विरोध नहीं किया; वे चाहते थे कि वे अपने लिए अच्छा मार्ग चुनें। अपने जीवन के बदलावों के साथ उन्होंने परिवार का यह सहयोग भी याद किया। [1]

2014 की बातचीत के समय वे हिजाब पहनती थीं, काम करती थीं और पढ़ाई भी कर रही थीं। विमानन की नौकरी, परीक्षाओं और छोटी बच्ची की देखभाल को साथ निभाना कठिन हुआ, इसलिए उन्होंने काम बदला। उन्होंने इस बदलाव का कारण बढ़ती ज़िम्मेदारियाँ बताया। [1]

इसके बाद उन्होंने कार्यक्रमों के आयोजन और दुबई में बसने वाले ब्राज़ीलियनों की सहायता का काम किया, साथ ही दूरस्थ शिक्षा से शिक्षाशास्त्र पढ़ा। बातचीत के समय उनके जीवन में आस्था के निर्णय के बाद भी सीखना, काम और ज़िम्मेदारियाँ थीं। उनकी यात्रा पाठक से पूछती है: किसी स्थान की छवि से आगे बढ़कर धर्म को स्वयं जानने पर क्या दिख सकता है? [1]

स्रोत

  1. मार्कोस कारिएरी — ANBA की मूल पुर्तगाली बातचीत, 3 मार्च 2014
  2. इसी बातचीत का अंग्रेज़ी अनुवाद — गैब्रिएल पोमेरांकब्लुम, ANBA

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