मुजाहिद फ़्लेचर: जब इस्लाम उनकी पहचान से पराया नहीं रहा

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जब उन्होंने इस्लाम को जाना
क्या इस्लाम के करीब आने के लिए नाम, भाषा और घर की स्मृतियाँ छोड़नी होंगी? या कोई विश्वास सिर्फ़ इसलिए पराया लगता है कि उसे अब तक घर की भाषा में समझाया नहीं गया?
Jaime Fletcher कोलंबिया में जन्मे और बचपन में Houston आए। वे अशांत किशोरावस्था और सड़क हिंसा का वर्णन करते हैं, फिर कुछ समय कोलंबिया में बड़े परिवार के साथ रहे। Texas लौटने पर जीवन फिर लापरवाह हुआ, जब तक 2000 के अंत में उनकी कार पलट नहीं गई और वे जीवित बच निकले।
हाइमे “मुजाहिद” फ़्लेचर की कहानी किसी मस्जिद के दरवाज़े से शुरू नहीं हुई। वह दो देशों और जीवन की दो बहुत अलग तस्वीरों के बीच शुरू हुई। उन्हें शांति, न्याय और अपनापन चाहिए था, पर अभी यह नहीं पता था कि इन आकांक्षाओं को कौन-सा अर्थ एक साथ जोड़ सकता है।
उनका जन्म कोलंबिया में हुआ और आठ वर्ष की उम्र तक वे वहीं रहे। फिर परिवार ह्यूस्टन आ गया। एलिफ़ की गलियाँ कठिन थीं। उन्होंने और उनके दोस्तों ने शुरू में सुरक्षा के लिए साथ बनाना चाहा, लेकिन वही समूह मुसीबतों में भी उतर गया। बचपन के एक मित्र ने उन दिनों को विद्रोह, तेज़ गुस्से और इस भ्रम के साथ याद किया कि अगला दिन हमेशा मिलेगा।
सोलह वर्ष की उम्र में खतरा चरम पर पहुँचा। विरोधी समूह के लोगों ने उन्हें मारने की धमकी दी; एक टकराव में उनके सिर पर चोट लगी और वे लहूलुहान घर पहुँचे। माता-पिता ने तय किया कि ह्यूस्टन अब सुरक्षित नहीं है और उन्हें रिश्तेदारों के पास कोलंबिया भेज दिया।
वहाँ लगभग बीस सदस्यों वाला विस्तृत परिवार उनके चारों ओर था और वे एक निजी विद्यालय में पढ़ने लगे। सड़क की उथल-पुथल से ढकी उनकी दूसरी क्षमता सामने आई: वे साठ विद्यार्थियों की कक्षा में दूसरे स्थान पर पहुँचे। दो वर्ष बाद वे अमेरिका लौटना नहीं चाहते थे; पारिवारिक भोजन, साथ बिताया समय और धीमी जीवन-लय ने उनके दिनों को फिर एक केंद्र दिया था।
फिर भी माता-पिता ने उन्हें वापस बुलाया। महीनों तक वे कोलंबिया की ज़िंदगी को याद करते रहे। पहले पुराने मित्रों से बचे, फिर धीरे-धीरे कम्युनिटी कॉलेज की कक्षाएँ छोड़ने लगे, ध्यान खोया और रात की वही जीवनशैली लौट आई। स्रोत इतना ही बताते हैं; इससे किसी मानसिक रोग का निदान करना या उनके पूरे व्यक्तित्व को युवावस्था की गलतियों में सीमित करना उचित नहीं है।
सन् 2000 की हैलोवीन रात के शुरुआती घंटों में, क्लबों से लौटते समय, वे तेज़ गति से इंटरस्टेट 10 पर गाड़ी चला रहे थे। कार पलट गई, पर वे केवल खरोंचों और हल्की चोटों के साथ बाहर निकले। उन्होंने बचने को वीरता नहीं माना। उनके अनुसार वे उस अंत से डर गए जो “ठीक जीवन” न जीते हुए आ सकता था, और समझ गए कि ईश्वर से अपना संबंध सुधारना होगा।
कोलंबिया से लौटने के बाद उनका इस्लाम से परिचय हो चुका था, लेकिन दुर्घटना ने तलाश को तत्काल बना दिया। उन्होंने ईसाइयत, बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और कब्बाला को देखा, फिर पश्चिमी ह्यूस्टन की एल फ़ारूक़ मस्जिद की कक्षाओं में गए। वे कैथोलिक परिवार में पले थे, पर गहरे धार्मिक नहीं थे; ट्रिनिटी उन्हें लंबे समय से उलझाती थी। ईश्वर की एकता स्पष्ट लगी, और पाँच नमाज़ों तथा नैतिक नियमों ने पूरे जीवन को व्यवस्थित करने का ढाँचा दिया।
निर्णय किसी एक हादसे या क्षणिक भावना का परिणाम नहीं था। उन्होंने अपने अध्ययन की अवधि को एक वर्ष कहा, जिसमें वे प्रश्न और आपत्तियाँ लेकर मुसलमानों के पास गए। उनके अनुसार प्रश्न बढ़े तो जीवन की स्पष्टता भी बढ़ी, और निर्णायक अर्थ सामने आया: मनुष्य का उद्देश्य ईश्वर के सामने समर्पण है। प्रकाशित विवरण यह नहीं बताते कि उस वर्ष की शुरुआत दुर्घटना से किस प्रकार जुड़ी थी, इसलिए उनके लगभग समय वाले कथन को उसी सावधानी से रखा गया है।
मई 2001 में, तेईस वर्ष की आयु में, उन्होंने फ़्लोरिडा के एक मुस्लिम सम्मेलन में औपचारिक रूप से इस्लाम स्वीकार किया। Houston Chronicle ने उपस्थित लोगों की संख्या लगभग पंद्रह सौ आँकी। सही दिन और वह व्यक्ति जिसने उन्हें शाहादा में मार्गदर्शन दिया, दर्ज नहीं हैं; इतना स्पष्ट है कि यह सार्वजनिक क्षण लंबे प्रश्न और तुलना की परिणति था।
ह्यूस्टन लौटकर उन्होंने बताया कि शराब, धूम्रपान और क्लब जाना छोड़ दिया—किसी निगरानी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि अपने बारे में उनकी समझ बदल गई थी। एक सप्ताह बाद उनकी प्रेमिका ने भी इस्लाम स्वीकार किया और एक महीने बाद दोनों ने विवाह किया। परिवारों को भय था: क्या वे “अरब बन गए” और अब कोलंबियाई नहीं रहे? अब चुनौती थी कि विश्वास जिएँ, पर अपनी भाषा, स्मृति और अपनापन न मिटाएँ।
कुछ महीनों बाद 11 सितंबर के हमले हुए। पिता और स्पेनी भाषा के मीडिया को इस्लाम समझाते हुए फ़्लेचर ने पाया कि भरोसेमंद स्पेनी ऑडियो-विज़ुअल सामग्री बहुत कम है। उनके लगभग तीन महीने बाद पिता ने इस्लाम स्वीकार किया और उनसे कहा: यदि किसी ने यह सामग्री नहीं बनाई, तो तुम इसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते? फ़्लेचर और उनकी पत्नी ने Art Institute of Houston में मल्टीमीडिया और ग्राफ़िक डिज़ाइन पढ़ा; पिता आवाज़ बने, पत्नी डिज़ाइनर, और पारिवारिक आवश्यकता IslamInSpanish का बीज बनी।
यह प्रयास आगे चलकर रिकॉर्डिंग, कार्यक्रमों, कक्षाओं और एक सामुदायिक केंद्र तक बढ़ा, जो लैटिनो लोगों से उनकी भाषा में संवाद करता है। फ़्लेचर की बाद की सलाह कहानी के दोनों हिस्सों को जोड़ती है: आक्रमण या निष्फल बहस से शुरुआत न करें; लोगों से वहीं मिलें जहाँ वे जीवन में हैं, मानवीय समझ बनाएँ और श्रोता की भाषा व सांस्कृतिक संदर्भ में बात करें। कभी उन्हें अपनी संभावनाएँ देखने में सहारे की जरूरत थी; बाद में उन्होंने उसी खोज को दूसरों के लिए ऐसा पुल बना दिया जहाँ ईश्वर की तलाश में स्वयं को खोना न पड़े।
यह कहानी किस प्रश्न का उत्तर देती है
क्या इस्लाम अपनाने के लिए अपनी भाषा और संस्कृति छोड़नी पड़ती है? मुजाहिद फ़्लेचर के अनुभव में तौहीद और नमाज़ ने धार्मिक प्रश्न का उत्तर दिया, जबकि बाद का जीवन दिखाता है कि Latino पहचान मिटानी नहीं पड़ती। स्पेनिश सामग्री की कमी ने उन्हें अपनी भाषा में पुल बनाने को प्रेरित किया। इस्लाम ईमान और विरोधी आदतों में फर्क करता है, पर अरब जातीयता को नई राष्ट्रीयता नहीं बनाता।
स्रोत
- Interview: Mujahid Fletcher — The Message International
- A new faith changes one man — Houston Chronicle
- Jaime “Mujahid” Fletcher — Texas Storyscapes
- Our Story — IslamInSpanish
फ़ोटो: Ashish AB / Unsplash.
