एडम कॉरी: एक अधूरा सवाल और तलाश की शुरुआत

हम क्या नहीं मानते, यह जान लेने के बाद भी एक सवाल रह सकता है: जीवन की बुनियाद किस पर रखें? मलेशियाई अभिनेता एडम कॉरी ली अब्दुल्लाह के लिए इस सवाल का एक निजी रूप था। उन्होंने अपने जीवन में महसूस किए गए खालीपन और किसी भरोसेमंद आधार की तलाश का वर्णन किया। [1]
परिचित लोग और अनसुलझा सवाल
एडम एक बौद्ध परिवार में पले-बढ़े। बाद में एक दौर ऐसा आया जिसे उन्होंने नास्तिकता का दौर कहा, जब वे ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते थे। 2018 में उनकी एक पोस्ट पर mStar की रिपोर्ट आई। उसमें उन्होंने उस खालीपन को याद किया और उसे सत्य की अपनी खोज से जोड़ा। [1]
2011 में उतुसान को उन्होंने बताया कि मुस्लिम मित्रों संग रोज़े रखे थे; रहीम की नमाज़ और सद्व्यवहार ने प्रभावित किया। परिवार ने उनका धर्मांतरण स्वीकारा। [4]
तेरह जुलाई की सुबह
एडम ने बाद में बताया कि 13 जुलाई 2007 के शुरुआती घंटों में उन्होंने ईश्वर से मार्गदर्शन माँगा। उन्होंने एक सपने का भी ज़िक्र किया जिसने उनके निर्णय को प्रभावित किया। [2]
उसी सुबह वे PERKIM पहुँचे और धार्मिक मार्गदर्शक Amran Abdullah के सामने शहादा पढ़ा। उनकी तलाश एक घोषित निर्णय बनी। उसके बाद इस निर्णय को रोज़मर्रा के जीवन में निभाना सीखने की राह थी। [2]
निर्णय के बाद सीखना
PERKIM की 2025 की रिपोर्ट में उन्होंने इस्लाम अपनाकर नमाज़ और छोटी कुरआनी सूरतें सीखना याद किया। बाद में Kembara Iman द्वारा नए मुसलमानों की सहायता की। [6]
एडम ने 2008 में विवाह किया। 2013 के साक्षात्कार में उन्होंने अभिनय के घटते अवसर और अपनी यात्रा सुनाने के आमंत्रणों का उल्लेख किया। [1][5]
इस तरह उनकी कहानी शहादा के दिन से आगे जाती है: जीवन का आधार खोजना, इबादत सीखना और अनुभव बाँटना। पाठक के लिए एक सवाल रह जाता है: ईश्वर, वह्य और इबादत के बारे में मैं क्या समझना चाहता हूँ, और सीखना कहाँ से शुरू कर सकता हूँ?
