काज़ुकी सुलेमान कानेहारा: स्क्रीन की छवि से हाथ में थामी किताब तक

हम किसी ऐसे धर्म के बारे में कितने निर्णय बना लेते हैं जिसकी मूल पुस्तक हमने कभी पढ़ी ही नहीं—जिसे हम केवल दूसरों द्वारा चुनी गई तस्वीरों से जानते हैं?
जापान में पले काज़ुकी कानेहारा ने बाद में बताया कि इस्लाम की उनकी शुरुआती छवि टेलीविज़न और फ़िल्मों से बनी थी, और वह नकारात्मक थी। वे किसी मुसलमान को निकट से नहीं जानते थे; इसलिए उस छवि को परखने के लिए उनके पास वास्तविक अनुभव नहीं था। [1]
उन्नीस वर्ष की आयु में जर्मनी पढ़ने गए कानेहारा ने पहली बार मुसलमानों को निकट से जाना। ये लोग टेलीविज़न और फ़िल्मों से बनी उनकी धारणा से अलग थे। [1] [2]
उनमें इस्माइल नाम का एक तुर्क मित्र था। कानेहारा ने उसके धैर्य और अच्छे व्यवहार को याद किया। इस्माइल ने बाद में उन्हें उस्मानिये में रमज़ान नामक शिक्षक से मिलवाया; वहाँ एक परिवार ने उनका स्वागत किया। दूर की आशंकाएँ अब उन लोगों के सामने प्रश्न बन सकती थीं जिनके नाम और घर थे। [2]
कानेहारा का सीखना एक-दो वर्षों तक अलग-अलग चरणों में चला। उनके अनुसार वे इस बात को लेकर आश्वस्त हो गए थे कि अल्लाह वास्तविक हैं, फिर भी यह तय करने में हिचक रहे थे कि क्या इस्लाम ही वह धर्म है जिसे वे चुनेंगे। अनादोलु एजेंसी को दिए बयान में उन्होंने क़ुरआन के अध्ययन को निर्णायक मोड़ बताया। निर्णय उन्होंने जापान में निजी रूप से लिया, पहले किसी को नहीं बताया। [2]
लगभग 2019 में उन्होंने उस्मानिये में इस्माइल और शिक्षक रमज़ान के सामने शहादा पढ़ी। वे पहले ही सूअर का मांस और शराब छोड़ चुके थे और बाद में सुलेमान नाम अपनाया। [2]
इस्माइल की मित्रता ने उन्हें खुलकर प्रश्न पूछने का अवसर दिया। कानेहारा ने क़ुरआन के अध्ययन को अपनी यात्रा का निर्णायक मोड़ बताया। [2]
कानेहारा ने बताया कि इस्लाम स्वीकार करने के लगभग दो वर्ष बाद उन्होंने अपने परिवार को सूचना दी। उनकी पत्नी ने भी बाद में इस्लाम अपनाया। [2]
काज़ुकी सुलेमान अपनी जापानी पहचान से जुड़े रहे और क्योटो में रेस्तराँ चलाने लगे। मित्रता और अध्ययन ने इस्लाम के प्रति उनका दृष्टिकोण बदल दिया। [1]
स्रोत
Anadolu English, 22 मार्च 2026 · उसी साक्षात्कार का तुर्की संस्करण
