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कैटी बटरफ़्लाई: एक सवाल को समय देना

क्षितिज के ऊपर नारंगी और नीला आसमान

क्या किसी नए विश्वास को जानने की शुरुआत तभी हो सकती है, जब हमारे पास सारे उत्तर हों? कभी किसी आवाज़ या बातचीत से ध्यान जाता है। लेकिन ध्यान जाना और विश्वास का निर्णय लेना एक बात नहीं हैं। उनके बीच सीखने की जगह होती है।

थाई कलाकार पोल्टी कट्टारेय, जिन्हें डीजे कैटी बटरफ़्लाई के नाम से जाना जाता है, ने अक्टूबर 2020 में अपने निर्णय के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वे जन्म से बौद्ध थीं और इस्लाम से पहले किसी दूसरे धर्म में नहीं गई थीं। [4]

घोषणा से पहले की राह

शहादा के समय उनका मार्गदर्शन करने वाले गुस मिफ़्ताह ने पत्रकारों को बताया कि डीजे का काम करके लौटते हुए फ़ज्र की अज़ान सुनकर कैटी को सुकून मिलता था। [3]

उनके अपने वीडियो से Liputan6 ने जो बातें प्रकाशित कीं, वे आगे की प्रक्रिया दिखाती हैं। कैटी लंबे समय से इस्लाम सीखना चाहती थीं। व्यस्तता बाधा बनी, फिर भी वे दोस्तों से पूछती रहीं। उन्होंने भीतर शांति महसूस करने का भी ज़िक्र किया। [2]

27 और 29 अक्टूबर

कैटी ने 29 अक्टूबर 2020, अपने बत्तीसवें जन्मदिन पर, सार्वजनिक रूप से बताया कि वे मुसलमान बन चुकी हैं। उन्होंने दृढ़ बने रहने के लिए दुआ भी माँगी। [1]

गुस मिफ़्ताह ने Suara को बताया कि उन्होंने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020 की शाम को शहादा का मार्गदर्शन किया था। स्थान दक्षिण तंगेरांग के बिंतारो क्षेत्र में एक अनाथ-देखभाल संस्था थी। दो दिन बाद कैटी ने सार्वजनिक घोषणा की। [1]

उनकी रुचि कई साल पुरानी थी। गुस मिफ़्ताह ने detik को बताया कि कैटी 2017 से उनसे सलाह ले रही थीं। [2] [3]

उनका निर्णय, उनकी बात

घोषणा के बाद तलाक़ और नए प्रेम-संबंध से जुड़ी अटकलें आईं। 30 अक्टूबर के वीडियो से अगले दिन प्रकाशित उनके स्पष्टीकरण में कैटी ने इन कारणों को नकारा और कहा कि उन पर दबाव नहीं था। उनके अनुसार उनकी इच्छा इन परिस्थितियों से पुरानी थी। [4]

शहादा के बाद सीखने की शुरुआत

नवंबर 2020 में कैटी ने बताया कि उन्होंने इस्लाम अपनाने से एक-दो महीने पहले अपनी माँ को अपने इरादे के बारे में बताया था। बाद में परिवार से फिर बात की। उनके अनुसार, माता-पिता ने उनके निर्णय का साथ दिया। [6]

उन्होंने क़ुरआन की पहली सूरह, अल-फ़ातिहा, और नमाज़ सीखनी शुरू की। भाषा की कठिनाई के कारण याद करने में समय लगता था, इसलिए उन्हें धीरे-धीरे सीखना पड़ा। [5]

अप्रैल 2021 में मुसलमान बनने के बाद उनका पहला रमज़ान आया। उन्होंने सहरी की तैयारी साझा की और रोज़े आसानी से रखने के लिए दुआ माँगी। [7]

जिस फ़ज्र की अज़ान में उन्हें सुकून मिला था, उसके बाद अब अल-फ़ातिहा सीखने की बारी थी। 2020 के अपने विवरण में उन्होंने कहा कि भाषा के कारण याद करना धीमा था, लेकिन वे कदम-दर-कदम सीखती रहीं। [2] [5]

स्रोत और सीमाएँ

फ़ोटो: Michał Mancewicz / Unsplash.