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योराम फ़ान क्लावेरेन: वह किताब जिसका उद्देश्य बदल गया

गर्म रोशनी में प्रकाशित खुली किताब के पन्ने
चित्र: byVlado · Unsplash लाइसेंस

योराम फ़ान क्लावेरेन ने अपना शोध इस्लाम के निकट आने की इच्छा से शुरू नहीं किया था। वे नीदरलैंड की फ़्रीडम पार्टी के पूर्व सांसद थे और उस राजनीतिक भाषा को गढ़ने में शामिल रहे थे जो मस्जिदों, क़ुरआन और इस्लामी स्कूलों पर रोक चाहती थी। एक धार्मिक प्रोटेस्टेंट परिवार में पले क्लावेरेन ने 2014 में पार्टी छोड़ दी, जब उन्हें लगा कि उसका संदेश धार्मिक आलोचना से आगे बढ़कर जातीय निशानेबाज़ी बन रहा है।

राजनीति छोड़ने के बाद वे ऐसी किताब लिखना चाहते थे जो उनके पुराने विचारों को सैद्धांतिक आधार दे। लेकिन तथ्यात्मक रूप से सही पुस्तक लिखने की कोशिश में उनके सामने ऐसी बातें आईं जो पुरानी छवि से मेल नहीं खाती थीं। नए प्रश्न उठे तो उन्होंने मुस्लिम विद्वानों से संपर्क किया, जिनमें अब्दुल हकीम मुराद भी थे। उन्हें लगा था कि राजनीतिक अतीत के कारण उत्तर नहीं मिलेगा; मुराद ने विस्तार से जवाब दिया, पुस्तकें सुझाईं और दूसरे विद्वानों के नाम बताए।

क्लावेरेन के मन में त्रिएकता, मसीह के बलिदान और मूल पाप जैसे ईसाई सिद्धांतों को लेकर पहले से प्रश्न थे। इसलिए इस्लाम की जाँच धीरे-धीरे ईश्वर की खोज बन गई। मुहम्मद की पैग़म्बरी वह आख़िरी बाधा थी जिसका उन्होंने स्पष्ट उल्लेख किया। कई महीनों तक पैग़म्बर के जीवन और चरित्र का अध्ययन करने के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि मुहम्मद सचमुच ईश्वर के रसूल हैं।

NRC को दी गई बातचीत के अनुसार, वान क्लावेरेन ने 26 अक्टूबर 2018 को अपने प्रकाशक के घर शहादा पढ़ा। उन्होंने यह भी बताया कि एक ईश्वर में विश्वास के बाद उन्होंने मुहम्मद की पैग़म्बरी स्वीकार की थी। एक रात पुरानी अरुचि का कुछ अंश बचा था, पर अगली सुबह वह चला गया और उन्होंने पत्नी तथा माँ को निर्णय बताया। 4 फ़रवरी 2019 को उनका मुस्लिम होना सार्वजनिक हुआ; खंडन की योजना उनकी यात्रा समझाने वाली पुस्तक Apostate बन गई। [V4, V2, V1]

पुराने संदेश से लौटना आसान नहीं था। बाद की एक बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें दो हज़ार से अधिक जान से मारने की धमकियाँ मिलीं, जिनमें पत्नी और बच्चों को भी निशाना बनाया गया। अतीत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने अपने शब्दों पर शर्म व्यक्त की। बाद के काम में वे उन भ्रांतियों को सुधारने लगे जिन्हें बनाने में कभी उनका भी हाथ था; उन्होंने इस्लाम से परिचित कराने वाली संस्था और सहानुभूति बढ़ाने वाले केंद्र में काम किया।

2024 में उन्होंने किताबों का शेल्फ़ गिरने की घटना बताई। क़ुरआन के अनुवाद में उनकी नज़र दिल के अंधेपन से जुड़े अंश पर पड़ी, जिसे उन्होंने अपनी स्थिति से जोड़ा। पैग़म्बर के जीवन और चरित्र का अध्ययन उन्होंने महीनों किया था; पहले की गवाही में उन्होंने उसी अध्ययन को पैग़म्बरी संबंधी अंतिम आपत्ति दूर करने वाला बताया था। [V2, V3]

नए मुसलमानों को उनकी व्यावहारिक सलाह है कि परिवार को धीरे-धीरे यात्रा में साथ लें, संबंध बनाए रखें और जल्दबाज़ी न करें। उन्होंने मुसलमानों से यह भी कहा कि गलत धारणाओं का उत्तर अच्छे आचरण, शिक्षा और स्पष्ट संस्थाओं से दें, केवल बहस से नहीं।

उनकी कहानी बताती है कि खंडन के उद्देश्य से शुरू हुआ शोध भी लेखक को बदल सकता है, यदि वह प्रमाण को अपनी धारणाएँ सुधारने दे। गलती स्वीकार करना भी केवल नई घोषणा से पूरा नहीं होता; पुराने शब्दों के प्रभाव की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। [V2, V3]

स्रोत

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