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स्टीफ़न जैक्सन: शहादा से पहले सात वर्षों की तलाश

सूर्योदय के समय खाली बाहरी बास्केटबॉल कोर्ट
चित्र: JC Dela Cuesta · Unsplash लाइसेंस

6 जनवरी 2021 को पूर्व NBA खिलाड़ी स्टीफ़न जैक्सन फ़िलाडेल्फ़िया की मस्जिद इब्न उसैमीन में मुसलमानों के बीच बैठे और शहादा पढ़ा। उन्होंने उस दिन की तस्वीर और वीडियो साझा करके उसे अपने जीवन के सबसे अच्छे दिनों में से एक कहा। सार्वजनिक क्षण छोटा था, लेकिन वहाँ तक पहुँचने का रास्ता लंबा था। बाद के साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह निर्णय सात या आठ वर्षों से उनके भीतर बन रहा था।

इस्लाम से उनका पहला स्पष्ट परिचय हाई स्कूल में मित्र मयाह अब्दुल्लाह और उनके परिवार के माध्यम से हुआ। जैक्सन ने कहा कि उनके धार्मिक जीवन में उन्हें अनुशासन, संतुलन और स्थिरता दिखाई दी। आगे चलकर मुस्लिम मित्रों का दायरा बढ़ा—विशेषकर नीस, जिनसे यात्राओं में जीवन और इस्लाम पर बार-बार बातचीत हुई, और जिब्रील यानी माज़ी, जो लगभग तीन वर्ष उनके साथ रहे।

माज़ी का इस्लामी जनाज़ा उनकी स्मृति में एक गहरा मोड़ बना। उन्होंने दफ़्न की सादगी और माज़ी की माँ का अल्लाह पर भरोसा देखा और कहा कि इस अनुभव ने उन्हें बदल दिया। फिर भी उन्होंने जनाज़े को पूरी कहानी का अकेला कारण नहीं बनाया। यह वर्षों की मित्रता, माज़ी के साथ कभी-कभी पढ़ी नमाज़, बचपन की सीख पर पुनर्विचार और लगातार गहरी होती निजी खोज का हिस्सा था।

फिर जॉर्ज फ़्लॉइड की हत्या हुई, जिन्हें जैक्सन अपना जुड़वाँ भाई कहते थे। इस क्षति ने पीड़ा और नमाज़ की आवश्यकता बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें लगा कोई उनकी अवस्था नहीं समझ रहा, इसलिए वे अधिक अल्लाह की ओर मुड़े। मित्रों की बातें, माज़ी के साथ नमाज़ और मुस्लिम परिवार की शुरुआती यादें लौट आईं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम अपनाना केवल एक संकट की भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं था; निर्णय वर्षों पहले शुरू हो चुका था।

शहादा से पहले चार महीनों में जैक्सन ने इस्लाम पर तेरह पुस्तकें पढ़ने की बात कही। साक्षात्कार उन पुस्तकों के नाम या विस्तृत धार्मिक प्रश्न नहीं बताता, इसलिए उनकी ओर कोई सूची नहीं जोड़ी जाती। उन्होंने साफ कहा कि वे तब तक रुके जब तक निर्णय दिल में स्थिर न हो गया और वे केवल अल्लाह के लिए इस्लाम में आए। तैयार होने पर उन्होंने टोन ट्रम्प को फ़ोन किया, साथ चलने को कहा और फ़िलाडेल्फ़िया पहुँचे।

बाद में जैक्सन ने पाँच वक्त की नमाज़ को शांति और अल्लाह पर भरोसे का स्रोत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पेशेवर बास्केटबॉल से जुड़े लोगों ने उनसे उनकी पढ़ी पुस्तकों और इस्लाम के बारे में पूछा। उनकी कहानी खोजने वाले को सरल सलाह देती है: धार्मिक निर्णय भीड़ के दबाव या क्षणिक आवेग में न लें; सीखें, पढ़ें और पूछें, जब तक चुनाव सचेत न हो।

स्रोत कोई पूरा धार्मिक संवाद नहीं देते और यात्रा को एक मित्र या एक दुख तक सीमित नहीं किया जा सकता। लेकिन क्रम स्पष्ट है: मुस्लिम घर में देखा आदर्श, वर्षों की दोस्ती, हानि से तीखा हुआ प्रश्न, निर्णय से पहले पढ़ाई और निश्चित तारीख पर सार्वजनिक शहादा। जैक्सन का सवाल धीरे-धीरे बढ़ा, फिर उत्तर उनके अपने चुने हुए कर्म में बदल गया।

स्रोत

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