ब्रायन राइट: जब इस्लाम की आलोचना उन्हें उसके मूल स्रोतों तक ले गई

हाई स्कूल तक आते-आते धर्म से उनका मोहभंग हो चुका था; चर्च जाना आस्था से अधिक परिवार के सामने दिखावा बनाए रखने का साधन था। लगभग एक दशक तक कैंसर से जूझने के बाद उनके पिता की मृत्यु हुई, और ब्रायन ने इस पीड़ा के लिए ईश्वर को दोष दिया। उनके निकट मित्र भी धर्म को गंभीरता से नहीं लेते थे, इसलिए कोई दूसरा मार्ग सामने नहीं आया।
विश्वविद्यालय में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अध्ययन को मुख्य विषय बनाया और एक विदेशी भाषा चुननी थी। उपलब्ध यूरोपीय भाषाएँ उन्हें नहीं भायीं, इसलिए उन्होंने अरबी चुनी। अध्यापकों ने काहिरा में एक सेमेस्टर की तैयारी के दौरान उन्हें स्थानीय मस्जिद के सार्वजनिक व्याख्यानों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी बाद की प्रत्यक्ष गवाही बताती है कि किसी मुस्लिम देश की उनकी पहली यात्रा 2004 में मिस्र की थी। वहाँ लगभग छह महीने रहकर उन्होंने रोज़मर्रा के जीवन में इस्लाम को देखा और अधिक निकट जाने की तैयारी के साथ लौटे।
लेकिन अगला कदम उलटी दिशा में गया। विश्वविद्यालय लौटकर उन्होंने धार्मिक इतिहास पढ़ा और आयशा की आयु, हिंसा और हुदूद दंडों से जुड़े कठिन प्रश्नों का सामना किया। इस्लाम के प्रति तीव्र विरोध वाले ब्लॉग और लेख पढ़ते-पढ़ते उन्हें कुछ समय के लिए विश्वास हो गया कि यह धर्म उनके लिए नहीं है। बाद में उन्होंने उस दौर के अपने आपको इस्लाम का “विरोधी” कहा, यद्यपि उन्होंने यह रुख सार्वजनिक रूप से कभी नहीं लिखा।
दूसरों की बहस दोहराने के बजाय मजबूत आधार बनाने के लिए उन्होंने सीधे क़ुरआन और सुन्नत की ओर रुख किया। प्रत्येक विषय में जितना गहराई से गए, तस्वीर उतनी ही जटिल निकली और विरोधी स्रोतों के वर्णन से अलग दिखी। प्रश्न तुरंत समाप्त नहीं हुए और मतभेद रातोंरात यक़ीन में नहीं बदले; विरोधी जानकारियों ने उन्हें कुछ महीनों के लिए खोज से पीछे हटने पर मजबूर किया।
विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष में एक मुस्लिम मित्र ने पूछा कि खोज कहाँ पहुँची। ब्रायन ने कहा कि अब वे ईश्वर के अस्तित्व और मुहम्मद के उसके पैग़ंबर होने को मानते हैं, मगर आगे क्या करना है नहीं जानते। ब्रायन की प्रकाशित गवाही में मित्र ने कहा कि यह विश्वास उन्हें भीतर से मुस्लिम बनाता है, केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। कुछ दिनों बाद ब्रायन ने माना कि यह वर्णन सही था।
रमज़ान के चौथे दिन, इस्लाम के विरुद्ध तर्क खोजते हुए लगभग एक वर्ष बिताने के बाद, वे एक स्थानीय मस्जिद गए और अपने ईमान की घोषणा की। उनकी गवाही मस्जिद का नाम या ग्रेगोरियन वर्ष प्रकाशित नहीं करती, इसलिए यह कहानी उससे अधिक सटीक तारीख़ नहीं जोड़ती। सुरक्षित अवधि 2004 की काहिरा यात्रा से शुरू होती है और मिस्र में उनके बाद के शैक्षणिक चरण से पहले समाप्त होती है; काहिरा स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी का अभिलेख बताता है कि जून 2012 में उन्होंने वहाँ एमए पूरा किया।
स्नातक अध्ययन के बाद वे मिस्र लौटे, सात वर्ष से अधिक वहाँ रहे, इस्लामी परंपरागत विषय पढ़े और एमए पूरा किया; आगे उन्होंने इस्लामी विधि-इतिहास में डॉक्टरेट किया। 2021 के लेख में उन्होंने लंबे समय तक मुस्लिम समाजों में रहे एक पश्चिमी मुस्लिम के रूप में लिखा और अनुभव की अच्छाइयों तथा कमियों दोनों को स्वीकार किया। वह दिनांकित गवाही उनके दर्ज इतिहास का भाग है; उसके बाद की निजी धार्मिक अवस्था का अनुमान लगाने का आधार नहीं।
