रिक हैरिसन: युद्ध से बनी छवि से जेद्दा हवाई अड्डे पर शहादा तक

रिक हैरिसन की यात्रा इस्लाम की सार्वजनिक घोषणा से बहुत पहले शुरू हुई थी। उन्होंने बताया कि पहले खाड़ी युद्ध के समय वे ग्वाटेमाला में अमेरिकी सेना के साथ काम कर रहे थे और उनके मित्र युद्ध में भेजे गए। वे युद्ध के कारण पर प्रश्न करते रहे, फिर इराक़ में थोड़े समय काम करने के बाद अमेरिका लौट आए। वहाँ सुनी गई बहुत-सी बातें इस्लाम को ऐसा धर्म बताती थीं जिसके साथ रहना कठिन है। उनके भीतर एक सीधा प्रश्न उठा: जिस चीज़ को न जाना हो और न जिया हो, उसके बारे में निर्णय कैसे दिया जा सकता है?
बाद में उन्हें दम्माम के किंग फ़हद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर काम मिला। अब मुसलमान समाचारों के दूरस्थ चेहरे नहीं, बल्कि वे सहकर्मी थे जिनसे इस्लाम और उसके बारे में कही जाने वाली बातों पर चर्चा हो सकती थी। अनुबंध पूरा होने पर वे काहिरा गए। उनके अनुसार वहाँ के चार वर्षों में इस्लाम की सच्चाई की खोज और गहरी हुई। यह क्षणिक भावावेश नहीं था; युद्ध और मीडिया से बनी छवि से प्रत्यक्ष परिचय, पढ़ने और प्रश्न करने तक की क्रमिक यात्रा थी।
एक नए अनुबंध पर वे सऊदी अरब लौटे और जेद्दा के किंग अब्दुलअज़ीज़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में अग्निशमन और बचाव इकाई के प्रमुख बने। उन्होंने कहा कि सहकर्मियों के अच्छे व्यवहार और उन्हें नमाज़ पढ़ते देखने ने उन पर गहरा प्रभाव डाला। रोज़मर्रा का आचरण उनकी पुरानी छवि के विपरीत था। साथ ही उन्होंने अपने निर्णय को धर्मग्रंथों के अध्ययन, ईश्वर की एकता और क़ुरआन के बारे में बनी अपनी धारणा से जोड़ा।
दिसंबर 2015 के आरंभ में उन्होंने एक सहकर्मी को अपनी इच्छा बताई। सहकर्मी इकट्ठा हुए और उन्होंने हवाई अड्डे पर उनके बीच शहादा पढ़ा। प्रकाशित वीडियो उस दृश्य को दर्ज करता है और हवाई अड्डे के जनसंपर्क अधिकारी ने पुष्टि की कि अमेरिकी कर्मचारी आपातकालीन सेवाओं में कार्यरत था। किंग फ़हद के प्रति सम्मान के कारण उन्होंने “फ़हद” नाम चुना। साक्षात्कार में उन्होंने ज़ोर दिया कि किसी ने दबाव नहीं डाला और निर्णय उनकी अपनी लंबी खोज का परिणाम था।
यह वृत्तांत केवल उनके कथन और उस समय उपलब्ध प्रमाण तक सीमित है। उन्होंने परिवार को अगली छुट्टी में बताने का निर्णय किया था और कहा था कि वे उन्हें इस्लाम शांतिपूर्वक समझाएँगे। उपलब्ध स्रोतों में आगे का पर्याप्त, प्रमाणित विवरण नहीं है; इसलिए बाद की घटनाओं या उनकी आज की धार्मिक स्थिति के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
