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पॉल पोग्बा: जब मित्रता और प्रश्न उन्हें उस नमाज़ तक ले गए जिसने खोज बदल दी

गर्म रोशनी में कालीन पर रखी बंद क़ुरआन
Malik Shibly / Unsplash — source · license.

पॉल पोग्बा का जन्म फ़्रांस में गिनी मूल के परिवार में हुआ। उनकी माँ इस्लाम का पालन करती थीं, पर उन्होंने साफ कहा कि उनकी परवरिश मुस्लिम के रूप में नहीं हुई। पहले धर्म उनके लिए दूर की चीज़ था; युवावस्था में मुस्लिम मित्रों के व्यवहार, नमाज़ और रमज़ान की संगत से वह निकट आया। यह विरासत में मिली पहचान का स्वतः विस्तार नहीं, बल्कि निजी प्रश्न की शुरुआत थी।

पोग्बा ने एक कठिन दौर का उल्लेख किया, जब वे जीवन की अनेक बातों पर सवाल करने लगे। मित्रों की बातचीत ने रास्ता खोला, लेकिन निर्णय की जगह नहीं ली। उन्होंने स्वयं पढ़ना शुरू किया, मित्रों के साथ मस्जिद गए और धर्म पर चर्चा की। बाद के साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि मित्रों की जीवन-शैली और सामूहिक नमाज़ ने ध्यान खींचा, फिर अपनी खोज ने उन्हें निष्कर्ष तक पहुँचाया।

उन्होंने एक साधारण निर्णायक क्षण याद किया: मित्रों के साथ एक बार नमाज़ पढ़ी और भीतर ऐसी शांति व भिन्नता महसूस की जो उनके लिए अर्थपूर्ण थी। उन्होंने इसे दूसरों के लिए प्रमाण नहीं बनाया; यह उनकी निजी पहचान का क्षण था, जिसके बाद उन्होंने कहा कि यही उनका धर्म है। वे नमाज़ और सीखने में आगे बढ़े और इबादत को कृतज्ञता और क्षमा माँगने से जोड़ा।

2019 में उन्होंने कहा कि इस्लाम ने उनका मन खोला, भीतर अधिक शांति दी और आख़िरत तथा मानव सम्मान के प्रति सजग किया। 2023 के साक्षात्कार में उन्होंने यही सूत्र फिर दोहराया: एक ईश्वर और उसकी आज्ञा ने जीवन के उद्देश्य को व्यापक अर्थ दिया और परिवार, काम, कठिनाई तथा सफलता को देखने का ढंग बदला।

मई 2017 में पोग्बा ने उमरा के दौरान काबा के पास अपनी तस्वीर साझा की। [CNN, 2017]

स्रोत

  1. The Independent द्वारा प्रकाशित Life Times का सीधा साक्षात्कार — 11 जून 2019
  2. Al Jazeera English का सीधा साक्षात्कार — 11 सितंबर 2023
  3. मक्का उमरा पर CNN की समकालीन रिपोर्ट — 28 मई 2017