Madarej

लॉरेन बूथ: जब वास्तविक जीवन ने मीडिया की छवि तोड़ दी

فناء مسجد ذي أقواس وبركة انعكاس

العربية · English · 中文 · हिन्दी · Español · Français · Deutsch

जब उन्होंने इस्लाम को जाना

लॉरेन बूथ की इस्लाम तक की यात्रा किसी मस्जिद से शुरू नहीं हुई थी, न ही उस क्षण से जब उन्होंने ईरान के क़ुम शहर में गहरी शांति महसूस करने की बात कही। इसकी शुरुआत लगभग पाँच वर्ष पहले हुई, जब यह ब्रिटिश पत्रकार और प्रसारक ग़ज़ा तथा वेस्ट बैंक में परोपकारी संस्थाओं के साथ काम करने के लिए फ़िलस्तीन पहुँचीं। बाद में उन्होंने कठोर ईमानदारी से लिखा कि वे मुस्लिम महिलाओं के बारे में एक अहंकारी पश्चिमी धारणा लेकर गई थीं: पर्दे में ढकी, चुप और ऐसी महिलाएँ जिनके जीवन का संचालन पुरुष करते हैं।

बूथ ब्रिटिश मीडिया में पहले से जानी जाती थीं। उन्होंने पत्रकारिता और टेलीविज़न में काम किया और फ़िलस्तीन से जुड़े विषयों पर सक्रिय रहीं। टोनी ब्लेयर के परिवार से उनका संबंध भी उन्हें सनसनीख़ेज़ सुर्ख़ियों के लिए आसान विषय बनाता था। लेकिन रामल्लाह के कार्यालयों और घरों में, और बाद में फ़िलस्तीन, मिस्र, जॉर्डन तथा लेबनान की यात्राओं में, उन्हें एक ऐसा जीवन मिला जो उनकी पुरानी तस्वीर में समाता नहीं था। उन्होंने शिक्षित और कामकाजी महिलाओं से मुलाक़ात की, सार्वजनिक जिम्मेदारियाँ निभाने वाली महिलाओं को देखा, और ऐसे पारिवारिक संबंधों तथा मानवीय गर्माहट का अनुभव किया जिन्हें समाचारों का परिचित ढाँचा समझा नहीं पाता था।

कोई एक दृश्य उन्हें अचानक यह बताने नहीं आया कि “यही इस्लाम है।” उनकी अपनी गवाही में बदलाव धीरे-धीरे जमा हुआ। उन्होंने कुछ मुसलमानों में ठहराव देखा, परिवारों में प्रेम व्यक्त करने का खुलापन देखा, और यह भी कि लोग रोज़मर्रा की जिम्मेदारियों के बीच इबादत को बनाए रखते थे। उनके भीतर प्रश्न उठने लगे: उन्हें इस्लाम के बारे में जो बताया गया था, वह उन लोगों से इतना संकरा क्यों था जिन्हें वे वास्तव में जान रही थीं? उनके परिचित वातावरण के कुछ संबंध इतने कठोर और अकेले क्यों लगते थे, जबकि मुस्लिम घरों में उन्हें निकटता और सहभागिता दिखाई देती थी?

निर्णय की सार्वजनिक घोषणा से पहले यह परिवर्तन उनकी प्रार्थना की भाषा तक पहुँच गया था। उन्होंने लिखा कि लगभग एक वर्ष से उनकी निजी प्रार्थना अनजाने में “डियर गॉड” के स्थान पर “डियर अल्लाह” से शुरू होने लगी थी—दोनों ही संबोधन उसी एक ईश्वर के लिए हैं। उन्होंने इसे अपने आप में कोई प्रमाण नहीं बनाया। उनके लिए यह इस बात का संकेत था कि इस्लाम को बिल्कुल पराया बनाने वाली भाषाई दीवार भीतर से कम हो रही थी। इस दौरान वे यात्रा करती रहीं, काम करती रहीं और अपनी दो बेटियों की देखभाल करती रहीं; आध्यात्मिक प्रश्न सामान्य जीवन की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ता रहा।

सितंबर 2010 में वे काम के सिलसिले में ईरान गईं और क़ुम में फ़ातिमा अल-मासूमा के मक़बरे में पहुँचीं, जबकि उस स्थान की यात्रा मूल कार्यक्रम का उद्देश्य नहीं थी। उन्होंने वुज़ू किया और वहाँ नमाज़ पढ़ी। बाद में उन्होंने उस क्षण को गहरी शांति, प्रसन्नता और कृतज्ञता से जोड़ा। एक आरंभिक साक्षात्कार में उन्होंने उस महिला को भी याद किया जो उनके पास आई और बिना पुरानी पहचान या पारिवारिक संबंध के प्रेम व्यक्त किया। बूथ के अनुसार, इस अनुभव ने प्रेम और किसी समुदाय से जुड़ने के अर्थ को उनके लिए विस्तृत कर दिया।

क़ुम का अनुभव उससे पहले के वर्षों से अलग कोई अचानक शुरू हुई घटना नहीं था। बूथ की अपनी गवाही में यह वह क्षण था जहाँ लंबे समय से जमा अवलोकन और प्रश्न एक साथ स्पष्ट हुए। उन्हें केवल कोई नई जानकारी नहीं मिली; उन्होंने ईश्वर के सामने अपनापन और संतोष अनुभव करने की बात कही, और उस धारणा पर फिर से विचार किया कि उपभोग और भौतिक सफलता स्थायी संतुष्टि दे सकते हैं। उनके शब्दों में, उस नमाज़ के बाद जीवन बस पहले जैसा नहीं रह सकता था।

ब्रिटेन लौटने पर उन्होंने इस्लाम स्वीकार करने का निर्णय किया। उनके प्रथम-पुरुष लेख के अनुसार, उन्होंने लंदन की एक मस्जिद में शहादा पढ़ी, जहाँ एक शेख़ ने उन्हें जल्दबाज़ी न करने, धीरे-धीरे सीखने तथा कपड़ों और बाहरी बातों पर लोगों के दबाव को समझ से आगे न रखने की सलाह दी। समकालीन रिपोर्टें इस निर्णय को लगभग सितंबर 2010 में, सार्वजनिक घोषणा से करीब छह सप्ताह पहले रखती हैं।

23 अक्टूबर 2010 को बूथ लंदन में ग्लोबल पीस एंड यूनिटी कार्यक्रम में सामने आईं और सार्वजनिक रूप से कहा कि वे मुसलमान हैं। यह पहले किए गए निजी चुनाव की सार्वजनिक घोषणा थी, निजी शहादा की वैकल्पिक तारीख़ नहीं। समाचार फैलते ही उनकी कहानी एक बहस बन गई: एक पश्चिमी महिला, जो हिजाब और महिलाओं के अधिकारों पर प्रचलित आरोपों से परिचित है, इस्लाम क्यों चुनेगी? उनका उत्तर उस अंतर से निकला जिसे उन्होंने स्वयं देखा था—मीडिया की धारणाएँ एक ओर थीं, और वास्तविक लोग, परिवार तथा धार्मिक जीवन दूसरी ओर।

निर्णय ने शीघ्र ही दैनिक व्यवहार का रूप लिया। उन्होंने नमाज़ शुरू की, हिजाब अपनाया, सूअर का मांस और शराब छोड़ दी, और क़ुरआन पढ़ने के लिए नियमित समय रखा। उन्होंने कहा कि शराब छोड़ने के उनके पिछले प्रयास सफल नहीं हुए थे, जबकि इस्लाम स्वीकार करने के शुरुआती सप्ताहों में वे वापस पीने की कल्पना भी नहीं कर पा रही थीं। यह आरंभिक परिवर्तन की उनकी ईमानदार गवाही थी; इसे चिकित्सकीय दावा या भविष्य के हर संघर्ष के समाप्त हो जाने की गारंटी नहीं बनाया जा सकता।

उन्होंने पारिवारिक जीवन में भी बदलाव बताया: शांत शामें, दिन की शुरुआत नमाज़ से और बेटियों के साथ अधिक उपस्थित रहने की भावना। वे खाना बनाती रहीं, काम करती रहीं और फ़िलस्तीन के बारे में टेलीविज़न कार्यक्रम तैयार करती रहीं। कहानी “सामान्य जीवन” छोड़कर किसी अलग धार्मिक दृश्य में जाने की नहीं थी; उसी सामान्य जीवन को इबादत और अर्थ के इर्द-गिर्द पुनः व्यवस्थित किया गया। उनकी बेटियों की निजी बातें उतनी ही रखी जानी चाहिए जितनी इस सार्वजनिक गवाही को समझने के लिए आवश्यक हैं।

सार्वजनिक निर्णय के साथ व्यंग्य और संदेह भी आया। कुछ लेखकों ने पश्चिमी महिला द्वारा इस्लाम चुनने को स्वतंत्रता छोड़ देने जैसा प्रस्तुत किया। बूथ ने उत्तर दिया कि महिलाओं पर अन्याय जहाँ भी हो उसका विरोध होना चाहिए, पर हर स्थानीय रीति या मानवीय दुर्व्यवहार को ईश्वर या धर्म की बुनियाद पर नहीं डाला जा सकता। उनकी परिवर्तन-कथा यह भी सिद्ध नहीं करती कि इस्लाम से पहले या बाद में व्यक्त उनकी प्रत्येक राजनीतिक राय धर्म की दलील है; व्यक्तिगत गवाही उनका मार्ग दिखाती है, उन्हें हर विषय का प्रामाणिक अधिकारी नहीं बनाती।

लॉरेन बूथ की कहानी इसलिए प्रेरक है कि वह मार्गदर्शन को किसी एक भावनात्मक क्षण में सीमित नहीं करती। वह तैयार धारणा से शुरू होती है, फिर वास्तविक लोग उस धारणा की सीमाएँ उजागर करते हैं और पेशेवर अवलोकन धीरे-धीरे निजी प्रश्न बन जाता है। क़ुम ने वर्षों के संचय को एक बिंदु पर स्पष्ट किया; नमाज़, अध्ययन, परिवार, काम और सार्वजनिक दबाव ने निर्णय को व्यवहार में परखा। इसका संदेश यह नहीं कि तीव्र अनुभूति अकेली पर्याप्त है, बल्कि यह कि ईमानदार मुलाक़ात, मूल स्रोतों की खोज, अर्थ का प्रश्न और निरंतर कर्म मिलकर मनुष्य को अपने जीवन को नए कोण से देखने में सहायता कर सकते हैं।

स्रोत

The Guardian में लॉरेन बूथ का प्रत्यक्ष लेख · The Guardian रिपोर्ट · The Independent रिपोर्ट · Islam Times साक्षात्कार

फ़ोटो: Muaz Semih Güven / Unsplash.