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जूलियन द्रोलों: लंबी तलाश से क़ुरआन तक

गर्म रोशनी में कालीन पर बंद क़ुरआन
Malik Shibly / Unsplash — स्रोत · लाइसेंस.

फ्रांसीसी मूल के जूलियन द्रोलों एक ईसाई परिवेश में बड़े हुए। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने बौद्ध धर्म को जाना और अलग-अलग आध्यात्मिक अभ्यास आज़माए। 2023 में Diyanet Journal को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि स्पेन के कामिनो दे सांतियागो मार्ग पर वे तीस दिनों में लगभग एक हज़ार किलोमीटर पैदल चले थे। उनकी बताई तलाश कई परंपराओं से होकर गुज़री; एक समय वे ईश्वर में विश्वास को किसी एक धर्म की सदस्यता से अधिक व्यापक मानते थे। [1]

इस्लाम से पहली मुलाक़ात के बारे में पूछे जाने पर उन्हें अबू धाबी की एक टैक्सी याद आई। रेडियो पर क़ुरआन का पाठ चल रहा था और, उनके अनुसार, उसने उनके दिल को छुआ। चालक ने उनकी प्रतिक्रिया देखी और उन्हें इस्लाम की ओर बुलाया। उनकी स्मृति में यह मुलाक़ात परिचय का एक द्वार थी; शहादा पढ़ने का निर्णय उनकी यात्रा में बाद में आया। [1]

द्रोलों ने उस निर्णय को एक अमेरिकी धर्म-परिवर्तित मुसलमान की बात सुनने से जोड़ा, जो बाइबिल और क़ुरआन का अंतर समझा रहा था। उन्होंने कहा कि उस परिचय ने उन्हें क़ुरआन के ईश्वरीय स्रोत का विश्वास दिलाया और सुनने के बाद उन्होंने शहादा पढ़ी। उन्होंने इस्लाम स्वीकार करने का वर्ष 2012 बताया, जब वे फ़िलिपींस में थे। उनके प्रकाशित निर्देशक-वक्तव्य में भी यही वर्ष दर्ज है। [1] [2]

उन्होंने शुरुआती प्रतिक्रियाओं को आसान नहीं बताया। 2023 की अपनी गवाही में उन्होंने कहा कि परिवार और मित्रों ने पहले निर्णय को अच्छी तरह स्वीकार नहीं किया, पर समय के साथ समझ और स्वीकृति बढ़ी। उनके अनुसार, कुछ मित्र दूर हुए, जबकि मुस्लिम समुदाय में नई मित्रताएँ बनीं। बरसों बाद अपने निर्णय के प्रभाव बताते हुए उन्होंने संबंधों में आए इन बदलावों का भी उल्लेख किया। [1]

इसके बाद नए मुसलमानों की सहायता भी उनके काम का हिस्सा बनी। फ़िल्म Freedom के साथ प्रकाशित वक्तव्य में उन्होंने बताया कि 2015 में वे New Muslim Care कार्यक्रम के महाप्रबंधक बने और अलग-अलग देशों के धर्म-परिवर्तित मुसलमानों से मिले। जनवरी 2016 में कार्यक्रम ने कुआलालंपुर में नए मुसलमानों के लिए शैक्षिक और आध्यात्मिक शिविर आयोजित किया। इन यात्राओं को सुनने के अनुभव से एक बड़ी फ़िल्म का विचार विकसित हुआ। [2]

द्रोलों ने ज़ारा शाफ़ी के साथ Freedom का सह-निर्देशन किया, जिसमें अलग-अलग देशों और भाषाओं की गवाहियाँ एकत्र की गईं। मई 2018 में इब्न खलदून विश्वविद्यालय ने फ़िल्म का प्रदर्शन और उनसे बातचीत आयोजित की; उन्होंने इस्लाम की नकारात्मक छवियों का उत्तर देने की इच्छा बताई। उस दौर में अपनी तलाश सुनाना दूसरों को उनकी भाषाओं में बोलने का अवसर देने तक पहुँचा—यह रास्ता उनकी तत्कालीन गवाही और सार्वजनिक काम में दर्ज है। [2] [3]

स्रोत

  1. ज़ेनेप फ़ेयज़ा अक्काया का जूलियन द्रोलों से साक्षात्कार — Diyanet Journal, अंक 3, 2023, पृ. 35–36
  2. निर्देशक-वक्तव्य और फ़िल्म विवरण — Freedom, FilmFreeway
  3. प्रदर्शन और बातचीत की रिपोर्ट — इब्न खलदून विश्वविद्यालय, 8 मई 2018

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