कमला सुरय्या: वर्षों के विचार के बाद घोषित किया गया निर्णय

भारतीय लेखिका को मलयालम पाठक माधविकुट्टी और अंग्रेज़ी पाठक कमला दास के नाम से जानते थे। 11 दिसंबर 1999 को एर्नाकुलम में केरल राज्य पुस्तकालय परिषद के एक कार्यक्रम में उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस्लाम स्वीकार करने और कमला सुरय्या नाम अपनाने का निर्णय घोषित किया। घोषणा स्पष्ट थी, पर उनके अनुसार यह कुछ दिनों में लिया गया अचानक फैसला नहीं था; इस विचार पर वे लंबे समय से सोच रही थीं।
उस दिसंबर के साक्षात्कारों में उन्होंने कलकत्ता में मुस्लिम परिवारों के बीच बिताए वर्षों, मस्जिदों की यात्राओं और मुस्लिम विद्वानों व महिलाओं से मुलाकातों का उल्लेख किया। वे कुरआन के कुछ अंश सीख चुकी थीं और नमाज़ पढ़ना तथा अरबी सीखना शुरू कर चुकी थीं। उन्होंने क्षमा और दया, साथ और लंबे अकेलेपन के बाद सुरक्षा की चाह के बारे में भी कहा। उनके अपने बयानों में ये कारण साथ-साथ आते हैं; किसी एक को पूरी यात्रा का अकेला कारण नहीं बनाया जा सकता।
पहली खबर में 23 दिसंबर को पलायम मस्जिद में रस्म होने की घोषणा थी। फिर 16 दिसंबर की Rediff रिपोर्ट ने बताया कि स्थान बदलकर कोच्चि में उनका घर कर दिया गया है। मिली गज़ेट के दूसरे अंक में कल्लाडा हमज़ा ने लिखा कि रस्म 16 दिसंबर को घर पर इमाम वी. एम. सुलेमान मौलवी ने कराई थी। इस तरह बाद की रिपोर्ट शुरुआती योजना से अलग थी; इससे पहले वे अपने निर्णय की सार्वजनिक घोषणा कर चुकी थीं। [4.1] [4.2]
सात महीने बाद सुरय्या ने Rediff से एक मुसलमान के रूप में बात की। उन्होंने कहा कि नमाज़ ने उन्हें शक्ति और विश्वास दिया और उनकी आस्था बढ़ रही थी। उन्होंने माना कि धार्मिक समुदायों में भी पूर्वाग्रह हो सकते हैं, फिर भी अपने चुनाव को दृढ़ विश्वास से लिया गया निर्णय बताया। क्षमा का अर्थ और धर्म समझाने वाले शिक्षकों की उपलब्धता उनके लिए महत्वपूर्ण रही। इस चरण में आस्था एक बढ़ती हुई यात्रा थी, केवल एक बार घोषित की गई पहचान नहीं।
2007 के एक साक्षात्कार में उन्होंने एक अलग व्याख्या दी। उन्होंने कहा कि उन्हें एक मुस्लिम पुरुष से प्रेम हुआ और उन्होंने प्रेम के लिए धर्म बदला; प्रेम को अपना एकमात्र धर्म भी कहा। साथ ही वे स्वयं को मुसलमान कहती रहीं और अल्लाह की दया का उल्लेख किया। इस बाद के कथन को हटाया नहीं जा सकता, पर यह 1999 और 2000 में नमाज़, क्षमा, सीखने और साथ के बारे में कही बातों को भी मिटाता नहीं। ईमानदार वर्णन यही है कि उन्होंने अलग समय में अपने निर्णय को अलग तरह से समझाया।
घोषणा के परिणाम भी सामने आए। 13 दिसंबर को उनके पुत्र एम. डी. नालापत ने बताया कि परिवार को धमकी भरे फोन मिले हैं और वे माँ के पास रहने आए हैं। उन्होंने उनके चुनाव के प्रति परिवार का समर्थन और साथ बने रहने की बात कही। उसी रिपोर्ट में सुरय्या ने अपने पास पहुँच रहे स्नेह और सहयोग का उल्लेख किया। पुत्र ने धमकियों के बाद उनके पास रहने की बात कही, जबकि रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पुलिस की दी हुई सुरक्षा स्वीकार नहीं की थी। [5]
स्रोत
- The Milli Gazette — Noted author embraces Islam, 2000-01-01
- Rediff — When the temptress dons the purdah, 1999-12-14
- Rediff — Kamala Das, nee Surayya, is VHP’s new hate object, 1999-12-13
- Rediff — The Rediff Interview: Kamala Suraiya, 2000-07-19
- Impressions — Love is My Only Religion: An Interview with Kamala Das, 2007-07
- The Guardian — Kamala Das obituary, 2009-06-18
- Rediff — D Jose, Surayya caught in the eye of a storm, 1999-12-16
- The Milli Gazette — Kallada Hamza, Uproar over the embracing of Islam by a celebrated writer, Vol. 1 No. 2
