मार्सेल सियाहान: घोषणा से बहुत पहले शुरू हुई यात्रा

मार्सेल सियाहान की धर्म में रुचि उस समय से बहुत पहले की थी जब लोगों ने उनके इस्लाम स्वीकार करने पर प्रश्न किए। बचपन में वह विभिन्न धर्मों के कार्यक्रम देखते, कुरआन की तिलावत की प्रतियोगिताएँ सुनते और आसपास नमाज़ पढ़ते लोगों को देखते थे। उनकी खोज ईश्वर से संबंध की थी, केवल सार्वजनिक पहचान की नहीं।
इस्लाम से पहले उनकी यात्रा ईसाई धर्म और बौद्ध धर्म से होकर गुज़री। 2021 में डैनियल मनांता से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अनजानी चीज़ से डरने के बजाय उसे समझना चाहते थे। उन्होंने सुना, देखा और आस्था के अनुसार जीवन जीने वालों से मिलकर अर्थ और सुकून की तलाश जारी रखी।
उनकी पत्नी रीमा मेलाती एडम्स इस खोज में साथ थीं। सिंगापुर और मलेशिया में उनके मुस्लिम परिवार की निकटता ने मार्सेल का ध्यान खींचा। साथ रहते हुए उन्होंने सीखा। बाद में उन्होंने बताया कि रीमा का सहयोग पूरी प्रक्रिया में बना रहा। यह वही प्रभाव है जिसे उन्होंने स्वयं स्वीकार किया।
2021 में सार्वजनिक बातचीत के बाद कुछ लोगों ने समझा कि यह उनका पहला रमज़ान था। लेकिन कुम्पारन के सीधे साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहली बार 2012 में रोज़ा रखा था। खबर बनने से पहले कई वर्ष बीत चुके थे। वह ऐसी निजी बातों पर आम तौर पर पूछे जाने पर ही बोलते थे।
इस्लाम चुनने का कारण पूछे जाने पर उन्होंने सुकून और दूसरों के काम आने की संभावना का ज़िक्र किया। आस्था उनके लिए केवल भीतरी अनुभव नहीं थी। उन्होंने परिवार में अपनी ज़िम्मेदारी और आसपास के लोगों के लिए उपयोगी बनने की इच्छा भी बताई। विश्वास का असर संबंधों और कर्तव्यों पर पड़ता था।
महामारी के संदर्भ में उन्होंने ईश्वर के सामने समर्पण और अपने नियंत्रण से बाहर परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखने की बात कही। यह लंबे समय से उनकी तलाश थी, कोई पूरी हो चुकी उपलब्धि नहीं। उनके विवरण में निरंतर सीखने और पत्नी के सहयोग के वर्ष दिखाई देते हैं।
यह यात्रा याद दिलाती है कि खबर की तारीख हमेशा विश्वास की शुरुआत की तारीख नहीं होती। अचानक दिखने वाली घोषणा के पीछे लंबी निजी खोज हो सकती है। क्या हम लोगों को शांति से समझने और सीखने का अवसर देते हैं, या केवल घोषणा के क्षण को देखते हैं?
