मरयम यू नाराए: वे रोज़े का इंतज़ार खुशी से क्यों करते थे?

2019 के रमज़ान में यू नाराए का ध्यान रोज़ा रखने वालों की खुशी ने खींचा। रिज़ाल और उनके मुस्लिम मित्र दिन में भोजन छोड़ने वाले महीने की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे थे। भूखा रहना है, तो इतना इंतज़ार क्यों? 2020 में Sinar Harian को उन्होंने बताया कि इस प्रश्न ने उन्हें रोज़े के बारे में पूछने और फिर स्वयं उसे आज़माने के लिए प्रेरित किया। [2]
इससे पहले दक्षिण कोरिया के आनसान में उनका जीवन काम और माँ की सहायता में बीतता था। Wolipop को उन्होंने बताया कि माँ के साथ मेट्रो स्टेशन पर अखरोट के केक बेचती थीं और लंबे काम से थक जाती थीं। बाद में अस्पताल में फ़िज़ियोथेरेपिस्ट बनीं, फिर भी कभी-कभी माँ का हाथ बँटाती रहीं। वहीं मलेशियाई छात्र रिज़ाल से परिचय हुआ। प्रस्ताव था कि वे उन्हें अंग्रेज़ी सिखाएँगे और उनसे कोरियाई सीखेंगे। धीरे-धीरे बातचीत भाषा से आगे जीवन और धर्म तक पहुँची। [1]
उनकी जिज्ञासा केवल भोजन तक नहीं रही। जून 2019 में रिज़ाल का परिवार कोरिया आया। उन्होंने Wolipop को बताया कि सफ़र में परिवार का नमाज़ के लिए जगह ढूँढ़ना और सुबह उनकी माँ को नमाज़ तथा दुआ करते देखना, यू नाराए की इस्लाम में रुचि बढ़ाता गया। वे लोगों की रोज़मर्रा की दिनचर्या में इबादत देख रही थीं और उसका अर्थ पूछ रही थीं। [1]
रिज़ाल के साक्षात्कार के अनुसार, दोनों 10 जुलाई को सियोल की इतावोन मस्जिद गए। इमाम ने उन्हें अपने सामने घोषणा करने से पहले इस्लाम, ईमान और इस्लाम के स्तंभों के बारे में पढ़ने को कहा। अगले दिन वे फिर आए। 11 जुलाई 2019 को उन्होंने इमाम के सामने शहादा पढ़ा; मरयम उनके सार्वजनिक परिचय का हिस्सा बन गया। [1][2]
मरयम ने Sinar Harian को बताया कि माँ ने उनके चुनाव का समर्थन किया और उनकी खुशी देखकर प्रसन्न हुईं। अगस्त 2019 में उन्होंने रिज़ाल से विवाह किया। लेकिन आसपास सभी लोग बदलावों को नहीं समझते थे। मित्र हिजाब, खाने और शराब के बारे में पूछते थे; अब ये बातें उनके अपने दैनिक निर्णयों का हिस्सा थीं। [2]
2020 के विवरण में उन्होंने अस्पताल के सामूहिक रात्रिभोज से मना करने की कठिनाई बताई, जब भोजन उनकी धार्मिक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होता था। उन्हें असुविधा होती थी कि मना करना सहकर्मियों के प्रति बेरुख़ी या स्थानीय रिवाजों का अनादर समझा जा सकता है। घर काम के पास था, इसलिए वे वहाँ नमाज़ पढ़तीं और शाम को पति के साथ नमाज़ अदा करतीं। [2]
2024 में उन्होंने कोरिया में रोज़े का एक अनुभव फिर सुनाया। सहकर्मी समझ नहीं पाते थे कि वे भोजन क्यों नहीं ले रही हैं और उन्हें खिलाने की कोशिश करते थे। उन्होंने समझाया और मुँह में दिया गया खाना बिना निगले निकाल दिया। वे इसे सहकर्मियों की ममता और रोज़े की जानकारी न होने से जोड़ती थीं। सीखने में अपने साथ काम करने वालों को अपना चुनाव समझाना भी शामिल था। [3]
2020 के साक्षात्कार के अंत में उन्होंने इस्लाम पर विचार करने वालों को सच्चाई और ईमानदारी से आगे बढ़ने की सलाह दी, साथ ही कठिनाइयों को स्वीकार किया। रोज़े की खुशी से उठा प्रश्न पढ़ने, नमाज़, भोजन और रोज़मर्रा के संबंधों तक पहुँचा। आस्था से परिचय के बाद उसे जीवन में निभाना सीखने का काम जारी रहा। [2]
