सभी कहानियों पर वापस जाएँ

नूर जन्नाह चान: सृष्टिकर्ता के प्रश्न से कुरआन पढ़ने तक

गर्म रोशनी में कालीन पर रखा बंद कुरआन
चित्र: Qur’an still life — Malik Shibly / Unsplash (Unsplash लाइसेंस).

नूर जन्नाह चान सिंगापुर के एक चीनी परिवार में पली-बढ़ीं जो अपनी परंपराएँ निभाता था, जबकि वे अपने पुराने दृष्टिकोण को अज्ञेयवादी बताती थीं। बचपन से धर्म और सृष्टिकर्ता के अस्तित्व के प्रश्न आते थे, पर उन्होंने उन्हें टालना सीखा। विमान-परिचारिका के काम और विशेषकर तुर्की की एक उड़ान ने वह जिज्ञासा फिर खोल दी।

इस्लाम से उनका संबंध किसी तैयार निर्णय से शुरू नहीं हुआ। पहले उन्हें यह धर्म बहुत प्रतिबंधपूर्ण लगता था और वे पूछती थीं कि लोग इसमें क्यों रहते या इसे क्यों अपनाते हैं। एक मुस्लिम सहकर्मी से परिचय के बाद उन्होंने तय किया कि वे धारणा को स्वयं जाँचेंगी, केवल छवि या किसी निकट व्यक्ति को प्रसन्न करने की इच्छा पर निष्कर्ष नहीं बनाएँगी।

उन्होंने कुरआन पढ़ना और शुरुआती कक्षाओं में जाना शुरू किया। सूरह अल-बक़रह तक पहुँचने पर कुछ अंश समझ में नहीं आए और पहली सोच से टकराए, इसलिए वे लगभग रुक गईं। एक मित्र ने पूरा पाठ पढ़ने को कहा। आगे बढ़ने पर, उनके अनुसार, ऐसे उत्तर मिले जिन्होंने इस्लाम संबंधी कई धारणाएँ सुधारीं।

सीखने का असर धीरे-धीरे जीवन में आया: उन्होंने सूअर का मांस छोड़ा, हलाल भोजन चुना, कुछ पहनावा बदला और रात में कुरआन पढ़ा। इन संकेतों से उनकी माँ चिंतित हुईं और विरोध हुआ। धार्मिक खोज के साथ कठिन पारिवारिक प्रश्न जुड़ गया—बढ़ते विश्वास पर कायम रहते हुए मतभेद को स्थायी दूरी बनने से कैसे रोका जाए?

मूल पॉडकास्ट उनके इस्लाम स्वीकार करने का वर्ष 2014 बताता है, लेकिन शहादा का दिन या स्थान प्रकाशित नहीं करता। कहानी निर्णय को केवल विवाह तक सीमित नहीं करती। साक्षात्कार संदेह, कुरआन-पाठ और कक्षाओं की यात्रा बताते हैं, जिसके अंत में उन्होंने कहा कि प्राप्त ज्ञान के बाद पुरानी स्थिति में लौटना संभव नहीं था।

इसके बाद पारिवारिक तनाव आया और उन्होंने अच्छे आचरण से संबंध सुधारने का प्रयास किया। प्रकाशित बयान में उन्होंने इस्लाम को बेहतर बेटी बनने के प्रयास से जोड़ा। बाद में हलाल और पौष्टिक भोजन की समझ को शिशु-आहार व्यवसाय में भी उतारा। ये 2018 और 2022 के वृत्तांत हैं, आज की धार्मिक स्थिति पर दावा नहीं।

उनकी यात्रा खोजी को याद दिलाती है कि पहले कठिन अंश पर ग्रंथ न छोड़े और पहली छवि को अंतिम निर्णय न बनाए। ईमानदार खोज में पूरा पढ़ना, संदर्भ समझाने वाले शिक्षक और संबंधों के दबाव से स्वतंत्रता चाहिए। नए मुसलमान को परिवार के साथ धैर्य भी चाहिए, ताकि विश्वास पर स्थिरता और माता-पिता के प्रति भलाई साथ रहें।

स्रोत

क़बस कथा-सूची पर लौटें