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सुमय्या मीहन: ईश्वर की एकता के प्रश्न से कुवैत में शहादा तक

गर्म रोशनी में कालीन पर रखी बंद क़ुरआन
Malik Shibly / Unsplash — source · license.

यह यात्रा किसी एक नाटकीय क्षण से शुरू नहीं हुई। कॉलेज के दिनों में Sumayyah Meehan ईसाई परंपरा से परिचित थीं, लेकिन विरासत में मिले उत्तर उनके प्रश्नों को शांत नहीं करते थे। दिसंबर 1992 के पहले सप्ताह में ईश्वर की भलाई और ईसा के सूली पर चढ़ाए जाने से जुड़ा एक प्रश्न उन्हें यह जाँचने की ओर ले गया कि वे वास्तव में क्या जानती और मानती हैं। निर्णय तुरंत नहीं आया; खोज कई वर्षों तक चली।

1993 में उनकी मुलाक़ात एक मुसलमान से हुई जिसने इस्लाम के मूल विश्वास समझाए। इस्लाम की उनकी पहले की छवि मीडिया में मुसलमानों के नकारात्मक चित्रण और एक पाठ्यपुस्तक में मुस्लिम महिलाओं के कठोर वर्णन से बनी थी। इसलिए शुरुआती प्रश्नों में महिलाओं की स्थिति और मस्जिद में उनकी नमाज़ शामिल थी। उत्तर अंतिम पड़ाव नहीं बना, पर उसने उन्हें सुनी हुई छवि को स्वयं परखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कॉलेज पुस्तकालय में क़ुरआन का अंग्रेज़ी अनुवाद खोजा और बच्चों की किताबों के हिस्से में एक उपेक्षित प्रति पाई। पहले माता-पिता के प्रति भलाई का उल्लेख पढ़ा, फिर मूसा, नूह, ईसा और मरयम को क़ुरआन की कथा में पाया। धीरे-धीरे ईसा को एक नबी और रसूल के रूप में, और सभी नबियों को एक ईश्वर की इबादत की निरंतर पुकार में समझा। पारिवारिक कठिनाइयों, पढ़ाई और शिक्षक की अनुपस्थिति ने कुछ समय के लिए रास्ता रोक दिया।

1995 में खोज फिर शुरू हुई। विवाह और कुवैत जाने के बाद, उनके अनुसार उन्होंने 1996 में एक मस्जिद में शहादा पढ़ा। स्रोत दिन, महीना, मस्जिद का नाम, गवाह या शब्द प्रकाशित नहीं करते; इसलिए सुरक्षित समय केवल 1996 है। उनका वर्णन यह भी बताता है कि घोषणा के बाद सीखना आसान नहीं हुआ: अंग्रेज़ी किताबें कम थीं और आसपास कोई ऐसा नहीं था जो उनकी भाषा में नमाज़ सिखा सके।

बाद में उन्होंने क़ुरआन को फिर उठाया और पूरा पढ़ा। इंटरनेट और ईमेल के माध्यम से नमाज़ सिखाने वाली एक मुस्लिम महिला ने भाषा की दूरी कम की। यह अनुभव दिखाता है कि विश्वास तक पहुँचना, उसके बाद धैर्यपूर्ण शिक्षा और व्यावहारिक साथ की आवश्यकता को समाप्त नहीं करता।

सत्यापन के स्रोत

  1. Finding Islam: The Road Less Traveled — About Islam
  2. My Muslim Husband — The Religion of Islam (1 September 2008)
  3. Muslims Love Jesus Too! — About Islam archive
  4. Ramadan, the Season of Sharing and Caring — Khaleej Times (19 September 2008)
  5. A Bittersweet Homecoming — Al Jumuah
  6. Sumayyah Meehan — About Islam author profile