सूज़न कारलैंड: मैं सच में क्या मानती हूँ?

सूज़न कारलैंड अपने चर्च को स्नेह से याद करती थीं। बाद में जब उन्होंने इस्लाम अपनाने की कहानी सुनाई, तो साफ़ कहा कि उनका धार्मिक बचपन अच्छा रहा था और आसपास के लोगों ने उनके साथ अच्छा व्यवहार किया था। फिर भी सत्रह साल की उम्र में एक सवाल उठा: क्या मैं इसे इसलिए मानती हूँ कि मुझे यह सच लगता है, या इसलिए कि मुझे बचपन से यही सिखाया गया है?
इस सवाल ने उन्हें दूसरे धर्मों को जानने की ओर बढ़ाया। शुरुआत में इस्लाम में उनकी दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन उससे उनका सामना बार-बार होता रहा। जब उन्होंने मीडिया की छवि और कुछ मुसलमानों के व्यवहार से आगे बढ़कर इस्लाम के अपने ग्रंथ पढ़े, तो उनकी समझ बदली। एंड्रयू ली से बातचीत में उन्होंने बताया कि उसकी शिक्षाओं ने पहले उनकी बुद्धि को संतुष्ट किया; आध्यात्मिक लगाव बाद में गहरा हुआ।
फ़ैसला करने में समय लगा। उन्होंने उन्नीस साल की उम्र में, सितंबर 2001 से पहले, इस्लाम अपनाया। परिवार और दोस्तों की प्रतिक्रिया का डर उनके संकोच का एक कारण था। जब उन्होंने माँ को बताया, तो माँ ने रोते हुए उन्हें गले लगाया। प्यार और चिंता साथ मौजूद थे; आगे का रास्ता दोनों से धैर्य माँगता था।
सूज़न ने जल्द ही हिजाब पहनना शुरू किया। बदलाव दिखने लगा और कई कठिन बातचीतें हुईं। कुछ दोस्तियाँ भी खत्म हो गईं। वर्षों बाद उन्होंने अपनी युवावस्था की बहसों में मौजूद तीखेपन को भी पहचाना। माँ को उनकी पसंद समझनी थी, और उन्हें अपनी बात अधिक नरमी से रखना सीखना था। बाद के साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनका रिश्ता फिर अच्छा हो गया था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने पति के साथ संबंध शुरू होने से पहले मुस्लिम बन चुकी थीं। यह खोज और विश्वास के बाद लिया गया उनका अपना फ़ैसला था; विवाह बाद में हुआ। वह चाहती थीं कि उनकी कहानी को उनके वास्तविक अनुभव से समझा जाए, किसी तैयार धारणा से नहीं।
एंड्रयू ली से बातचीत में उन्होंने नमाज़ को नैतिक दिशा परखने का अवसर बताया; व्यस्तता में यांत्रिक हो जाने पर ध्यान लौटाना पड़ता था।
ABC के 2011 के परिचय में विक्टोरिया की नव-मुस्लिम सहायता सेवा की सह-संस्थापक और युवा कार्यकर्ता के रूप में उनका उल्लेख था।
2018 के SBS साक्षात्कार तक मुस्लिम महिलाओं और लैंगिक भेदभाव पर उनका शोध Fighting Hislam पुस्तक बन चुका था।
माँ को अपना निर्णय बताने पर उनकी यात्रा समाप्त नहीं हुई। वह पारिवारिक रिश्ते में परिपक्वता, जीवन में धार्मिक अभ्यास की भूमिका और दूसरों के साथ काम तक पहुँची। उनकी कहानी में जिन लोगों ने उन्हें स्नेह दिया था, उनके प्रति कृतज्ञता उस विश्वास के साथ बनी रही जिसने उन्हें अलग चुनाव की ओर बढ़ाया।
स्रोत
- एंड्रयू ली — इस्लाम और अपने प्रति ईमानदारी पर सूज़न कारलैंड
- ABC — सूज़न कारलैंड का साक्षात्कार
- SBS — अपने बचपन पर सूज़न कारलैंड
तस्वीर: Grace Anne Bobadilla / Unsplash.
