क़ुरआन के साथ छह महीने: याहिया एमरिक का सवाल से इस्लाम तक का सफ़र

याहिया एमेरिक अमेरिका के मिडवेस्ट के एक छोटे नगर में बैपटिस्ट परिवार में पले-बढ़े। किशोरावस्था में उन्होंने त्रित्व को समझाने वाला एक उपदेश सुना, लेकिन उससे उनके प्रश्न शांत नहीं हुए। वे और उलझे तथा धर्मशास्त्रीय विषयों में उनकी रुचि बढ़ी। [YE-S1]
कॉलेज के लिए घर से दूर जाने पर उन्होंने पढ़ने के रास्ते से आस्था के प्रश्न पर लौटना शुरू किया। उन्होंने लगभग छह महीने क़ुरआन पढ़ा। बाद में उन्होंने कहा कि पाठक से उसका सीधा संबोधन ऐसा तत्व था जिसे वे अनदेखा नहीं कर सके; इससे विषय अमूर्त बहस से आगे बढ़कर पाठ के प्रति निजी प्रत्युत्तर बन गया। [YE-S1]
लगभग 1989 में, अपने वर्णन के अनुसार कई महीनों की पढ़ाई के बाद, उन्होंने इस्लाम चुना। यह निर्णय उस खोज की अगली कड़ी था जो सिद्धांत के प्रश्नों से शुरू हुई और फिर पढ़े जा रहे पाठ से सीधे जुड़ाव तक पहुँची। [YE-S1, YE-S4]
इसके बाद उन्होंने अधिक गंभीरता से लिखना शुरू किया। उनका कहना था कि कई समकालीन इस्लामी पुस्तकें उन्हें एकांगी लगीं; वे ऐसा लेखन करना चाहते थे जो इस्लाम को उनकी समझ के अनुसार आध्यात्मिक, भावनात्मक, बौद्धिक और व्यावहारिक आयामों को जोड़ने वाली राह के रूप में सामने लाए। [YE-S1]
बाद में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया और 1992 में अमेरिकी संदर्भ के पाठकों के लिए इस्लामी साहित्य विकसित करने हेतु अमीरा पब्लिशिंग की स्थापना की। [YE-S4]
बाद में उनका कार्य वयस्कों और बच्चों की पुस्तकों, शिक्षा और अंतरधार्मिक संवाद तक फैला। इस तरह एक धर्मशास्त्रीय व्याख्या से उपजी उलझन और क़ुरआन के लंबे अध्ययन से गुज़रा मार्ग, पाठक के निकट भाषा में लेखन और शिक्षण की परियोजना बन गया। [YE-S3]
स्रोत
- YE-S1 — Meet the Author: Q & A with Yahiya Emerick, Ummah Reads.
- YE-S3 — Yahiya Emerick, Penguin Random House.
- YE-S4 — How did you accept Islam?, IslamiCity.
