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दाऊद वॉर्न्सबी: जब कुरआन जीवन का मार्गदर्शक बना

गर्म रोशनी में कालीन पर रखी बंद क़ुरआन
Malik Shibly / Unsplash — source · license.

दाऊद वॉर्न्सबी कनाडा में बड़े हुए और युवावस्था से ही लेखन तथा संगीत के लिए पहचाने गए। लेकिन जिस यात्रा का उन्होंने बाद में वर्णन किया, वह किसी मंच या अचानक बने नाटकीय दृश्य से शुरू नहीं हुई। वह व्यापक पढ़ाई और जीवन के उद्देश्य के प्रश्न से शुरू हुई। उन्होंने कहा कि कुरआन तक पहुँचने से पहले वे अलग-अलग धार्मिक ग्रंथ पढ़ चुके थे और मनुष्य, उसके सृष्टिकर्ता तथा इतिहास में जाने गए धर्मग्रंथों के आपसी संबंध को समझना चाहते थे।

उन्नीस वर्ष की उम्र में उन्होंने कुरआन को जाना। प्रकाशित साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि किस बात ने उन्हें रोका: उन्हें लगा कि कुरआन पहले के धर्मग्रंथों को जोड़ता है, उन्हें दूर-दूर की अलग दुनिया नहीं बनाता। उन्होंने इस खोज को किसी संवाद या रस्म के रूप में नहीं सुनाया, बल्कि एक स्पष्ट आंतरिक निर्णय के रूप में—जिस उद्देश्य की तलाश थी, उसका अर्थ मिलने पर कुरआन को अपना मार्गदर्शक बनाने का निर्णय।

पूरी यात्रा को उन्नीस वर्ष की उम्र में समेटना ठीक नहीं होगा। दिनांकित प्रत्यक्ष साक्षात्कार पर आधारित एक अकादमिक परिचय उनके इस्लाम स्वीकार करने के निर्णय को 1993 में रखता है, जब वे इक्कीस वर्ष के थे। वर्ष 2000 में प्रकाशित एक प्रत्यक्ष प्रेस-साक्षात्कार भी स्वतंत्र रूप से 1993 की पुष्टि करता है। जाँचे गए स्रोत कोई निश्चित दिन, महीना, स्थान, शहादा के शब्द या उपस्थित लोगों का विवरण नहीं देते; इसलिए यह कथा ऐसा दृश्य नहीं जोड़ती जिसे वॉर्न्सबी ने स्वयं नहीं बताया।

बाद के सार्वजनिक कलात्मक कार्य में कुरआन, आस्था, नैतिकता और मनुष्य की जिम्मेदारी जैसे विषय दिखाई दिए। इस बाद के अभिलेख से उनकी वर्तमान धार्मिक स्थिति का अनुमान नहीं लगाया जाता; वह केवल दिनांकित सार्वजनिक जीवन-वृत्त का हिस्सा है। 2018 में प्रकाशित एक साक्षात्कार में उन्होंने सृष्टि को देखने और लोगों की कहानियों से प्रेरणा लेने की बात की, और कहा कि मनुष्य अपनी प्रतिभाओं से आसपास की दुनिया में जो सुधार कर सकता है, वह करे।

उसी साक्षात्कार में उन्होंने उस समय की अपनी धार्मिक पहचान को ऐसी भाषा में रखा जो संप्रदायगत विभाजन से दूरी बनाती है, और मुसलमान होने को अल्लाह से संबंध तथा मानवता की सेवा से जोड़ती है। यह कथन अपने दिनांकित संदर्भ तक सीमित है; न यह वर्तमान स्थिति का दावा है, न किसी संप्रदाय का लेबल। इतिहास से इतना क्रम समर्थित है: पढ़ाई, उन्नीस वर्ष में कुरआन की खोज, और इक्कीस वर्ष में 1993 का प्रलेखित निर्णय।

वॉर्न्सबी की कहानी कला को ज्ञान का विकल्प नहीं बनाती और न किसी एक व्यक्ति की यात्रा को हर धार्मिक प्रश्न का उत्तर ठहराती है। वह उनके अपने शब्दों में एक खोज योग्य मार्ग दिखाती है: विभिन्न ग्रंथों का अध्ययन, संदेश की एकता को पहचानना और कुरआन को मार्गदर्शक चुनना। दूसरे खोजी के लिए इसका मूल्य यही है—प्रश्न को इतना खुला रखना कि वह स्वयं पढ़ सके, बिना दबाव और बिना गढ़े हुए दृश्य के।

स्रोत

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