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मोनिका रहीमा: दूर की धारणा से अपनी खोज तक

मेहराबों के नीचे धूप से रोशन खाली पत्थर का रास्ता

2014 में चेन्नई की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिनेत्री मोनिका ने इस्लामी अभिवादन से बात शुरू की और बताया कि उन्होंने 2010 में इस्लाम स्वीकार किया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस उनकी आस्था-यात्रा की शुरुआत नहीं थी, बल्कि उस फैसले की सार्वजनिक घोषणा थी जिसे उन्होंने लगभग चार साल तक निजी रखा, क्योंकि मीडिया से पहले वे अपने परिवार से बात करना चाहती थीं।

उन्होंने कहा कि इस्लाम के बारे में उनकी पुरानी छवि अच्छी नहीं थी और बहुत से लोगों की तरह वे भी उसे चरमपंथ से जोड़ती थीं। उन्हें भीड़भाड़ वाली जगहों में कई काम अकेले करने पड़ते थे, और अभिनेत्री के रूप में पहचाने जाने से यह और कठिन होता था। निजता और सुविधा के लिए उन्होंने बुर्क़ा पहनकर देखा। उससे मिली शांति ने उलटे एक सवाल जगाया—जिस इस्लाम को वे अभी जानती नहीं थीं, वह वास्तव में क्या है?

उन्होंने सवाल पूछना जारी रखा और मुस्लिम मित्र बनाए। मित्र मलिक ने उन्हें हसन से मिलवाया, जिन्हें वे बड़े भाई जैसा मानती थीं। हसन की सच्चाई और व्यवहार ने उन्हें प्रभावित किया। जब उन्होंने पूछा कि वे ऐसे कैसे रह पाते हैं, तो आसपास के लोगों ने इसे इस्लाम की शिक्षा से जोड़ा। यही पूरा निर्णय नहीं था, पर इससे खोज का दायरा बढ़ा।

मोनिका ने कहा कि उन्होंने इस्लाम के बारे में बहुत कुछ सीखा और समझने के बाद उसके सिद्धांतों को पसंद किया। इसलिए उन्होंने प्रेस में फैल रही आसान व्याख्या को अस्वीकार किया: उन्होंने किसी पुरुष या धन के लिए धर्म नहीं बदला। उनके अनुसार किसी अस्थायी रिश्ते के लिए धर्म बदलना ऐसी आस्था नहीं बना सकता जिसे जीवन में निभाया जा सके।

उनके परिवार में हिंदू और ईसाई—दोनों पृष्ठभूमियाँ थीं। उन्होंने शुरुआती विरोध को याद किया, फिर परिवार ने माना कि उनके प्रति प्रेम और रिश्ता मतभेद से अधिक महत्वपूर्ण है। “एम. जी. रहीमा” नाम चुनते समय उन्होंने माता-पिता के नामों के शुरुआती अक्षर बनाए रखे; परिवर्तन ने परिवार से उनका संबंध नहीं मिटाया।

उन्होंने अभिनय छोड़ने की घोषणा भी की। बचपन से जुड़े पेशे से विदा होना पीड़ादायक था, लेकिन वे अपना निर्णय स्पष्ट करना चाहती थीं ताकि काम के प्रस्ताव बंद हों। यह उनकी निजी कहानी का चुनाव था, दूसरों पर लागू किया जाने वाला नियम नहीं।

प्रकाशित सामग्री उनकी गवाही के दिन या स्थान को नहीं बताती, लेकिन उनका सीधा बयान सुरक्षित है कि परिवर्तन 2010 में हुआ और सार्वजनिक घोषणा 30 मई 2014 को की गई। इस कहानी की ताकत दूर से बने निर्णय से सीखने और सवाल करने तक की यात्रा में है—और इस आग्रह में भी कि उनका कारण अफ़वाहों से नहीं, उन्हीं से सुना जाए।

स्रोत

फ़ोटो: Timur Seyfelmlyukov / Unsplash.

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