निकोल क्वीन: जब जीवन के उद्देश्य की तलाश इस्लाम की क्रमिक यात्रा बनी

निकोल क्वीन का बचपन लुइज़ियाना के तटीय क्षेत्र और टेक्सास में डलास के दक्षिण के इलाके में बीता। एक कट्टर बैपटिस्ट चर्च और धार्मिक दादा-दादी ने उनके भीतर ईश्वर का आरंभिक बोध बनाया। उन्होंने अपने माता-पिता को ऐसे ईश्वर-विश्वासी स्वतंत्र विचारकों के रूप में याद किया जिनका धार्मिक अभ्यास बहुत गहरा नहीं था। बचपन पीछे छूटने पर भी धार्मिक प्रश्न समाप्त नहीं हुए; वे बाहर से व्यस्त और सफल दिखने वाले जीवन के नीचे बने रहे।
कॉलेज के बाद उन्होंने डलास में कार्यक्रमों और नाइटलाइफ़ की फ़ोटोग्राफ़ी की। कैमरा उन्हें मशहूर लोगों, खिलाड़ियों और पार्टियों के बीच ले जाता था; काम रात में शुरू होता और अक्सर तब समाप्त होता जब शहर सो रहा होता। बाद में उन्होंने कहा कि छवि और उपभोग की वह दुनिया उन्हें वह शांति और उद्देश्य नहीं दे सकी जिसकी वे तलाश कर रही थीं। इसे उन लोगों पर निर्णय नहीं बनाया जाना चाहिए जिनकी तस्वीरें उन्होंने लीं; यह उनके अपने जीवन में महसूस हुई कमी का वर्णन है।
उनके कुछ मुस्लिम मित्र शराब और कुछ नाइटलाइफ़ स्थानों से दूर रहते थे, इसलिए उन्होंने कारण पूछना शुरू किया। बाद में उनकी मुलाकात हसन से हुई, जो आगे चलकर उनके पति बने और स्वयं भी धर्म से अपने संबंध पर फिर विचार कर रहे थे। उन्होंने इस्लाम के बारे में बताया और कक्षाएँ लेने का सुझाव दिया, पर निकोल की खोज का स्थान नहीं लिया। निकोल ने बुनियादी विश्वासों और स्तंभों का अध्ययन किया, यूसुफ़ एस्टेस की सामग्री देखी और परिचित मुसलमानों में अनुशासन तथा उद्देश्य पर ध्यान दिया।
निर्णय एक छलाँग में नहीं आया। क्वीन ने धर्म-परिवर्तन को लंबा संक्रमण कहा, जिसमें उन्हें यह सुनिश्चित करना था कि आधार वास्तव में उनके विश्वास योग्य है। On Being में उनकी सीधी गवाही एक अहम बात जोड़ती है: इस्लाम स्वीकार करने से पहले उन्होंने दो साल रमज़ान में रोज़े रखे—पहले जिज्ञासा से और इसलिए कि भूख-प्यास मनुष्यों को समान और विनम्र बनाती है। इस प्रकार अभ्यास निर्णय से पहले आया और सीख को परखने का एक साधन बना।
अप्रैल 2007 में उन्होंने इस्लाम स्वीकार करने और शहादा पढ़ने का निर्णय लिया। प्रकाशित गवाही समय को केवल इसी महीने तक निश्चित करती है; स्रोत कोई सटीक दिन, स्थान, गवाह या शब्द नहीं देते, इसलिए किसी रस्म की कल्पना नहीं की जा सकती। 2019 की स्वतंत्र रिपोर्ट भी वर्षों में फैली क्रमिक प्रक्रिया बताती है, जिसमें कुरआन पढ़ना और मुस्लिम मित्रों से सीखना शामिल था। कहानी को विवाह, एक वीडियो या नाइटलाइफ़ से क्षणिक असंतोष तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
निर्णय के बाद अपने पहले रमज़ान का वर्णन करते हुए उन्होंने बाहरी उपवास और नमाज़ तथा नीयत से जुड़े इबादती रोज़े के बीच अंतर बताया। उन्होंने नए मुस्लिम की उस अकेलेपन की भी चर्चा की जो एक ओर परिवार को चयन विद्रोह जैसा लगने और दूसरी ओर नए समुदाय के अभी अपरिचित होने से पैदा हो सकता है; फिर ससुराल और आसपास के मुसलमानों में मिले अपनत्व का उल्लेख किया। बाद के स्रोत उनके सार्वजनिक कार्य का रिकॉर्ड देते हैं, लेकिन ये दिनांकित बयान आज की निजी धार्मिक स्थिति के बारे में अनुमान की अनुमति नहीं देते।
निकोल की कहानी तीन जुड़े प्रश्न छोड़ती है: सामाजिक सफलता के बावजूद अर्थ की तलाश अधूरी क्यों रह सकती है? रोज़मर्रा का अनुशासन किसी विचार का प्रभाव निर्णय से पहले कैसे दिखाता है? और घोषणा के बाद नए मुस्लिम को कैसी देखभाल चाहिए ताकि वह अकेला न रहे? एक जीवन सभी उत्तर नहीं देता, पर यह दिखाता है कि संगति द्वार खोल सकती है, क्रमिक अध्ययन और अभ्यास स्वतंत्र चुनाव की रक्षा करते हैं, और निर्णय के बाद की सहायता सार्वजनिक घोषणा जितनी ही महत्वपूर्ण है।
स्रोत
- AboutIslam — Nicole Queen’s first-person account, republished 9 April 2023
- On Being — Revealing Ramadan, direct transcript, originally aired 10 September 2009
- The National — independent interview and profile, 17 June 2019
- Akbar Ahmed, Journey into America — field-study chapter on Muslim converts, 2010
