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स्टीव वुड: जब पहरेदारी ने सवालों का दरवाज़ा खोला

गर्म रोशनी में कालीन पर रखी बंद क़ुरआन
चित्र: Qur’an still life — Malik Shibly Unsplash पर (Unsplash लाइसेंस).

स्टीव वुड 2004 में ग्वांतानामो पहुँचे तो इस्लाम और मुसलमानों के बारे में उनकी तस्वीर दूर की और सीमित थी। उनका पालन-पोषण ओरेगन के एक छोटे शहर में इवेंजेलिकल माहौल में हुआ था। वर्षों बाद उन्होंने बताया कि तब तक वे किसी मुसलमान से मिले नहीं थे और दूसरे धर्मों तथा संस्कृतियों के बारे में बहुत कम जानते थे। 11 सितंबर के हमलों के बाद सैन्य सेवा की उनकी इच्छा और प्रबल हुई; उनके अपने बयान के अनुसार, वे ऐसी ड्यूटी चाहते थे जिसका उद्देश्य साफ और महत्वपूर्ण हो।

सामान्य बैरकों में उनका काम अधिक समय नहीं चला। उन्हें Echo Special नाम की अत्यंत गोपनीय एकल हिरासत इकाई में रात की ड्यूटी दी गई, जहाँ मोहम्मदू ऊल्द सलाही को अकेले रखा गया था और अत्यंत खतरनाक बंदी माना जाता था। आदेशों और सुरक्षा उपायों से वुड को लगा कि वे दुनिया के सबसे खतरनाक लोगों में से एक की निगरानी कर रहे हैं। लेकिन सलाही के पास बिताए घंटों ने उस पहले से बनी तस्वीर का साथ नहीं दिया।

पहरेदारी के काम ने वुड को ऐसे व्यक्ति के करीब रखा जो इतिहास, राजनीति और धर्म पर चर्चा करता और उन्हें आगे पढ़ने को प्रेरित करता था। कभी वे सलाही का कुरआन खोलकर आयत का नंबर बताते; सलाही उसे अरबी में याद से पढ़ते और अंग्रेज़ी में अर्थ समझाते। वुड ने इसे कुरआन से अपना पहला सीधा परिचय कहा। वे और पूछना चाहते थे, पर उनके अनुसार उन्हें डर था कि इस्लाम में दिलचस्पी दिखाने से बेस पर संदेह पैदा होगा। [3]

उन्होंने यह भी देखा कि लगभग सब कुछ छिन जाने की परिस्थिति में भी पाँच वक्त की नमाज़ सलाही के दिन को क्रम देती थी। ओरेगन लौटकर वुड ने इस्लाम पर वे किताबें पढ़नी शुरू कीं जिन्हें ग्वांतानामो में माँगने से वे डरते थे। वे ग्वांतानामो और उस व्यक्ति के बारे में समाचार खोजते रहे जिसकी उन्होंने निगरानी की थी। इस्लाम अब केवल खबरों से जुड़ी छवि नहीं रहा; वह ऐसा प्रश्न बन गया जिसे कुरआन और इतिहास पढ़कर, तथा धर्म को लोगों के कर्मों और उसके आसपास की राजनीति से अलग करके समझना था।

पोर्टलैंड की मस्जिद As-Saber में उनकी यात्राएँ 2006 में शुरू हुईं। वे नमाज़ों के बीच के समय जाते ताकि भाग लेने का दबाव महसूस न हो। अगले महीनों में यह क्रम चला; तीसरी यात्रा में उन्होंने दो सऊदी छात्रों से कहा कि वे मुसलमान बनना चाहते हैं और दोनों उनकी शहादा के गवाह बने। मई 2019 में प्रकाशित Amanpour साक्षात्कार में पत्रकार बेन टॉब ने उनका धर्म-परिवर्तन 2006 में बताया, ग्वांतानामो छोड़ने के लगभग एक वर्ष बाद। [5.1] [5.3]

नया जीवन हमेशा एक समान नहीं चला। 2019 का लेख बताता है कि शुरू में वे कभी-कभी नमाज़ में जाते थे। फिर मस्जिद के आसपास कुछ लोगों के बारे में मिली खबरों से डर गए; उन्होंने सार्वजनिक रूप से नमाज़ पढ़ना छोड़ दिया और कहा कि वे इसे अपने और ईश्वर के बीच रखना चाहते हैं। लेख एक बाद के दौर का भी वर्णन करता है जब वे बहुत कम नमाज़ पढ़ते थे और धर्म से कम सांत्वना पाते थे, हालाँकि दिल में उनका विश्वास बना हुआ था। यह उनके जीवन के उस दौर का विवरण था। [6]

अक्टूबर 2016 में रिहा होने के बाद सलाही ने वुड को फोन किया; ग्यारह वर्ष से न सुनी हुई आवाज़ फिर लौट आई। जनवरी 2019 में वुड उनसे मिलने मॉरिटानिया गए। बेन टॉब उनके साथ थे और उन्होंने यात्रा दर्ज की। दोनों ने चार दिन साथ बिताए और लेख के अनुसार साथ नमाज़ भी पढ़ी। जेल से बाहर इस मुलाकात ने पहरेदारी के दिनों में बनी दोस्ती को आगे बढ़ाया; सीधा परिचय और अध्ययन वुड को उस धार्मिक चुनाव तक ले जा चुके थे जिसका उन्होंने बाद में वर्णन किया। [7.1] [7.3]

स्रोत

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