अली व्याचेस्लाव पोलोसिन: जब लंबी तलाश तौहीद तक पहुँची

व्याचेस्लाव पोलोसिन की यात्रा अपने पुराने धर्म से किसी क्षणिक विवाद से नहीं, बल्कि वर्षों तक बढ़ते प्रश्न से शुरू हुई: यदि ईश्वर एक, सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान है, तो मनुष्य और ईश्वर के बीच मध्यस्थों तथा कुछ अनुष्ठानों को कैसे समझा जाए? दर्शन पढ़ने और फिर ऑर्थोडॉक्स पादरी बनने के बाद इस्लाम से उनका पहला औपचारिक परिचय ऐसे सेमिनरी पाठ्यक्रम में हुआ जो मुख्यतः ऑर्थोडॉक्स दृष्टिकोण की रक्षा करता था।
1983 से 1985 के बीच मध्य एशिया में सेवा करते हुए वे मुसलमानों से सीधे मिले। बाद में उन्होंने एक ताजिक शैख की बात याद की कि वे मुसलमान बनेंगे; यह उनकी स्मृति है, कोई सार्वभौमिक संकेत या प्रमाण नहीं। उनके अपने लेखन के अनुसार गहरी दिशा ईसाई इतिहास, उपासना और सिद्धांत के लंबे अध्ययन से बनी, जिसे वे एकेश्वरवाद की कसौटी पर परख रहे थे।
उन्होंने लिखा कि 1995 तक निष्क्रिय पादरी रहते हुए भी चर्च अनुष्ठानों में भाग लेना छोड़ दिया था, पर यह स्पष्ट नहीं था कि निर्मल एकेश्वरवाद कहाँ मिलता है। 1996 के एक टीवी कार्यक्रम ने इस्लामी तौहीद को उनकी समझ की भाषा में रखा। कुरआन का पहला रूसी अनुवाद उन्हें अस्पष्ट लगा; लगभग एक वर्ष बाद उन्होंने इमान वलेरिया पोरोखोवा का अनुवाद और ईसा के बारे में इस्लामी शिक्षा पढ़ी।
क़ुरआन का अनुवाद पढ़ने और ईसा के बारे में इस्लामी दृष्टिकोण जानने के बाद पोलोसिन ने लिखा कि इस्लाम स्वीकार करने का संदेह समाप्त हो गया था। उनके विवरण में 1998 का संबंध पत्नी के साथ किए गए उस निर्णय से है जिसमें पहले दो गवाहों के सामने निजी रूप से और फिर सार्वजनिक रूप से एकेश्वरवाद स्वीकार करना था। उन्होंने सार्वजनिक घोषणा वसंत 1999 में बताई; पुस्तक की जीवनी संबंधी टिप्पणी मई 1999 लिखती है। [P1]
उन्होंने अपने नाम के साथ अली जोड़ा, यात्रा की व्याख्या करने वाली पुस्तकें लिखीं और सार्वजनिक मुस्लिम शिक्षा में काम किया। उनके लेखन पर बड़ा विवाद भी हुआ। इसलिए कथा उनके हर ऐतिहासिक या धर्मशास्त्रीय निष्कर्ष को निर्विवाद तथ्य नहीं बनाती; उन्हें उन्हीं कारणों के रूप में रखती है जिन्हें उन्होंने अपने निर्णय से जोड़ा।
यह कहानी किसी धर्म को उसके अपने स्रोतों से समझने और कठिन प्रश्न को पकने का समय देने का महत्व दिखाती है। फिर भी एक व्यक्ति का अनुभव अपने आप में प्रमाण नहीं और शैख की बात भी दलील नहीं। स्रोत जिन बातों को ठोस रूप से स्थापित करते हैं वे हैं: दीर्घ अध्ययन, घोषित निर्णायक कारण और मई 1999 की सार्वजनिक घोषणा।
स्रोत
- Ali Vyacheslav Polosin / Islamland mirror — Почему я стал мусульманином (Why I Became Muslim), book-length first-person account, PDF edition dated 2009 / 1430 AH
- Индекс / Досье на цензуру — Почему я стал мусульманином, 2000, issue 11
- БИЗНЕС Online — Тайный шейх сказал мне: У тебя мусульманские глаза…, 2016-09-12
- IslamNews / Radio Russia report — Али Вячеслав Полосин: Прямой путь к Богу на Радио России, 2006-04-16
