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शुरुआती आकर्षण से सोच-समझकर लिए निर्णय तक: द जैका की इस्लाम-यात्रा

गर्म रोशनी में कालीन पर रखी बंद क़ुरआन
चित्र: Qur’an still life — Malik Shibly / Unsplash (Unsplash लाइसेंस).

अमेरिकी रैपर ‘द जैका’ ने इस्लाम तक अपने सफ़र को किसी अचानक घटे, अतीत से कटे क्षण की तरह नहीं, बल्कि लंबी प्रक्रिया की तरह बताया। इसकी शुरुआत वह कैलिफ़ोर्निया के बे एरिया में अपने बचपन से जोड़ते थे। आठ या नौ वर्ष की उम्र में नॉर्थ ओकलैंड की एक मुस्लिम बेकरी के पास बच्चों के एक समूह की एकता ने उन्हें आकर्षित किया। उसी दिन से वे स्वयं को मुस्लिम कहने लगे, किंतु बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय उनकी समझ उस एकता से प्रभावित होने से आगे नहीं बढ़ी थी।

डॉमिनिक न्यूटन गरीबी और पारिवारिक उथल-पुथल के बीच बड़े हुए और कम उम्र में सड़क की दुनिया में उतर गए। उन्होंने इस पृष्ठभूमि को न बहाना बनाया, न किंवदंती। बाद की गवाही में उन्होंने जीवित रहने के लिए किए कामों और बाद में उनके बारे में अपने नैतिक निर्णय में फ़र्क रखा। धार्मिक प्रश्न फिर भी उनके साथ रहा: किशोरावस्था में मैल्कम एक्स से प्रभावित होकर उन्होंने सूअर का मांस छोड़ने तथा परिवार और महिलाओं का सम्मान करने का निश्चय किया; समय के साथ उन्होंने क़ुरआन पढ़ना और जानकार लोगों से सीखना शुरू किया।

लगभग वर्ष 2000 में डकैती के एक मामले में उन्होंने करीब एक वर्ष काउंटी जेल में बिताया। वहाँ उन्होंने क़ुरआन का गहन अध्ययन किया। उनके अनुसार, इस अध्ययन ने उन्हें पहले मिली कुछ शिक्षाओं पर पुनर्विचार करने को प्रेरित किया और सुन्नी इस्लाम में उन्हें सीधे ईश्वर की इबादत का मार्ग दिखाई दिया। उनकी कथा में यह बौद्धिक मोड़ था, पर प्रत्यक्ष स्रोत यह नहीं कहता कि उन्होंने जेल के भीतर किसी निश्चित दिन शहादा पढ़ा।

2009 में प्रकाशित उनका साक्षात्कार अगला कदम रिहाई के बाद रखता है: जेल से निकलने के बाद उन्होंने शहादा पढ़कर औपचारिक रूप से इस्लाम अपनाया। पाठ में दिन या महीना नहीं है, इसलिए सावधान अभिव्यक्ति यही है—‘रिहाई के बाद, लगभग वर्ष 2000’। बाद की रिपोर्टों ने इसे जेल में धर्मांतरण कहकर संक्षिप्त किया; वे उस अवधि के महत्व की पुष्टि करती हैं, पर स्वयं उनके बताए अधिक सटीक क्रम का स्थान नहीं लेतीं।

द जैका ने शहादा के बाद के जीवन को निष्कलंक नहीं बताया। उन्होंने बाद के वर्षों में फिर अपराध की ओर लौटने और अपने कर्मों के लिए ईश्वर के सामने जवाबदेही की बात साफ़-साफ़ कही। 2011 में लिए गए और उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि नमाज़, क्षमा माँगना और ईश्वर का शुक्र अदा करना उन्हें संतुलन देता था; उस समय उन्होंने स्वयं को सुन्नी मुस्लिम बताया। यह तारीख़-बद्ध ऐतिहासिक गवाही है, उनके अंतर्मन पर फैसला या उनके कर्मों की सफ़ाई नहीं।

इस्लाम ने संगीत और अपने आसपास के लोगों के बारे में उनकी भाषा को भी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि क़ुरआन के पाठ ने उनकी आवाज़ पर असर डाला और साझा आस्था ने रैपर फ़्रीवे के साथ उन्हें संगीत या धन से अधिक निकट किया। उसी साक्षात्कार में उन्होंने अपने बच्चों, भाई-बहन और मित्रों को मुस्लिम बताया, लेकिन अपनी कहानी को व्यक्तिगत पूर्णता का दावा नहीं बनाया।

इस यात्रा के तीन चरणों को मिलाना नहीं चाहिए: दिखाई देने वाली एकता से एक बच्चे का आकर्षण, अध्ययन से अधूरी समझ का सुधरना, और शहादा के माध्यम से व्यक्त किया गया सोच-समझकर लिया निर्णय। इसकी शक्ति इसी अनगढ़ ईमानदारी में है। उनके लिए आस्था ने विरोधाभास की ज़िम्मेदारी मिटाई नहीं; उसने उसे देखना और उसका उत्तर देना आसान बनाया।

स्रोत

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